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सरबजीत को फांसी से बचाया बहन के संघर्ष ने

योगेश/चंडीगढ़

Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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गलत पहचान पर भाई को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद बहन ने न सिर्फ पाकिस्तान में कानूनी लड़ाई लड़ी बल्कि भारत में भी हर दर पर गुहार लगाई। बहन दलबीर कौर के इसी संघर्ष ने उनके भाई सरबजीत सिंह को फांसी के फंदे से बचा लिया। मंगलवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने न सिर्फ सरबजीत सिंह की फांसी की सजा को उम्रकैद में तबदील कर दिया बल्कि उनकी रिहाई के भी आदेश दे दिए।
सरबजीत की रिहाई के आदेश की खबर पाकर तरनतारन के भिखीविंड गांव निवासी उसके परिवार में खुशियां लौट आई हैं। भाई को जेल से रिहा कराने के लिए दलबीर कौर पाकिस्तान भी गईं। जेल अधिकारियों से लेकर पाकिस्तान के हुक्मरानों से पैरवी की और भारत में भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर हर उस शख्स से भाई की मुक्ति में मदद करने का भरोसा लिया, जिससे उन्हें जरा भी उम्मीद थी। पिछले दिनों पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के अजमेर दरगाह आने के बाद पाकिस्तानी वैज्ञानिक डॉ. खलील चिश्ती की रिहाई के बाद उन्होंने चिश्ती से भी गुहार लगाई थी और फिर से जरदारी से अपील की थी।

अपील के साथ दो पत्र भी थे। एक पत्र जामा मसजिद के इमाम का था और दूसरा अजमेर की दरगाह शरीफ के मुफ्ती का। इस अपील पर लाहौर के जाने माने मानवाधिकार मामलों के वकील ओवैश शेख ने कोट लखपत जेल में सरबजीत के दस्तखत कराकर हाल ही में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भेजा था।

कभी भी हो सकती है रिहाई
सरबजीत के जेल से कभी भी रिहा किया जा सकता। बहन दलबीर कौर ने फोन पर बताया कि जरदारी के आदेश के बाद कोट लखपत जेल में पत्रकारों को सरबजीत से बातचीत करने की वहां के पत्रकारों को इजाजत मिल गई है। उधर, सरबजीत को फांसी के फंदे से बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले पाकिस्तान के वकील ओवैश शेख ने मंगलवार को अमर उजाला को फोन पर बताया कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के आदेश के बाद लॉ -मिनिस्ट्री फैसले की जानकारी होम मिनिस्ट्री को भेज देगी। होम मिनिस्ट्री इसकी सूचना कोट लखपत जेल के सुपरिंटेंडेंट को देगा। सरबजीत उम्रकैद के बराबर जेल में रह चुके हैं इसलिए उन्हें जेल अधीक्षक जेल से रिहा करने और भारत को सौंपने के लिए भारतीय उच्चायोग को जानकारी दे देंगे। ओवैश के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में तीन दिन से सात दिन तक का समय लग सकता है।

फिल्म भी बन रही है...
चंडीगढ़। सरबजीत सिंह को फांसी के फंदे से बचाने के लिए संघर्ष की मिसाल बन गईं उनकी बहन दलबीर कौर की कहानी बहुत जल्द बड़े पर्दे पर दिखेगी। प्रस्तावित पंजाबी फिल्म का नाम ‘सरहदें: एक सच्ची गाथा’ रखा गया है और इसकी शूटिंग अमृतसर के पास स्थित सरबजीत के गांव भिखीविंड के अलावा पाकिस्तान में भी करने की तैयारी है। पिछले दिनों दलबीर कौर ने ‘अमर उजाला’ को बताया था कि निर्माता इंदरजीत सिंह इस फिल्म को बनाएंगे। कौर के मुताबिक अपने भाई को बचाने के लिए सरबजीत और उसके परिवार पर जो बीता है, उसकी सच्ची कहानी वे दुनिया के सामने लाना चाहती हैं। कुछ दिन पहले ही निर्माता इंदरजीत ने इशारा किया था कि इस फिल्म में पंजाब के एक प्रसिद्ध सूफी गायक की आवाज होगी। दलबीर के मुताबिक इस पंजाबी फिल्म को बाद में हिंदी में भी डब करने की योजना निर्माता की है।
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