दुश्मन से महफूज रहेगी दिल्ली, मुंबई की हवाई सीमा

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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देश के दो प्रमुख महानगरों दिल्ली और मुंबई को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की बैलेस्टिक मिसाइल रक्षा (बीएमडी) प्रणाली के लिए चुना गया है। यह प्रणाली बेहद कम समय में तैनात की जा सकती है। इस संबंध में सुरक्षा पर कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) से अंतिम मंजूरी के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार दोनों शहरों में बीएमडी सिस्टम लगाने के लिए योजना बनाने का काम शुरू हो गया है। पूरी परियोजना के विस्तृत विश्लेषण के बाद सरकार के समक्ष अंतिम प्रस्ताव पेश किया जाएगा। दुश्मन की मिसाइल का पता लगाने के लिए रडार लगाने के स्थलों और जवाबी हमला करने वाली प्रणाली के बारे में योजना के स्तर पर निर्णय होगा। इन स्थानों में दुश्मन के हमले से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है।

हवाई हमलों से अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीआरडीओ हमला निरोधक मिसाइलें तैनात करेगा, जो दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही मार गिराने में सक्षम होंगी। बीएमडी प्रणाली पूरी तरह स्वचालित है और इसमें मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत लगभग नहीं के बराबर है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली और मुंबई में सफलतापूर्वक तैनात होने के बाद इस प्रणाली को देश के अन्य प्रमुख शहरों को सुरक्षा कवच देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

डीआरडीओ द्वारा विकसित सुरक्षा कवच कई सफल परीक्षणों के दौर से गुजरा है। इसे 2000 किमी की दूरी से आने वाली बैलेस्टिक मिसाइल को नष्ट करने में सक्षम पाया गया। डीआरडीओ वर्ष 2016 तक इस प्रणाली की क्षमता को बढ़ाकर 5000 किलोमीटर तक करना चाहता है।

एलीट क्लब में शामिल हुआ था भारत
भारत ने इस प्रणाली का पहला परीक्षण नवंबर 2006 में किया गया था। इसके साथ ही देश उन एलीट देशों के क्लब में शामिल हो गया था जिसने एंटी बैलेस्टिक मिसाइल सिस्टम विकसित किया है। अमेरिका, रूस और इस्राइल के पास ही फिलहाल यह क्षमता है।

एक नजर में बीएमडी सिस्टम
-बेहद कम समय में तैनात किया जा सकता है।
-पूरी तरह स्वचालित है। मानवीय हस्तक्षेप की नहीं के बराबर जरूरत पड़ती है।
-दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही मार गिराने में सक्षम होंगी हमला निरोधक मिसाइलें
-दिल्ली और मुंबई में सफल तैनाती के बाद इस सिस्टम को देश के अन्य प्रमुख शहरों को सुरक्षा कवच देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

कैसे करता है काम
एंटी मिसाइल सिस्टम में संवेदनशील रडार की सबसे ज्यादा अहमियत है। ऐसे रडार बहुत पहले ही वायुमंडल में आए बदलाव को भांप कर आ रही मिसाइलों की पोजीशन ट्रेस कर लेते हैं। पोजिशन लोकेट होते ही गाइडेंस सिस्टम एक्टिव हो जाता है और आ रही मिसाइल की तरफ इंटरसेप्टिव मिसाइल दाग दी जाती है। इस मिसाइल का काम दुश्मन की मिसाइल को सुरक्षित ऊंचाई पर ही हवा में नष् ट करना होता है। इसे ट्रेस कर, पलटवार करने की प्रक्रिया में महज कुछ सेकंड का ही अंतर होता है।

भारत को क्यों है जरूरत
देश की पश्चिमी सीमा पाकिस्तान और उत्तरी सीमा चीन से लगती है। इन दोनों देशों के साथ भारत युद्ध लड़ चुका है। पाक के साथ भारत की अब तक तीन बार जंग हो चुकी है। दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। ऐसे में भारत को अपनी सुरक्षा के लिहाज से हर हाल में तैयार रहने की जरूरत है।

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