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घरेलू हिंसा रोकेंगे अहिंसा मैसेंजर

नई दिल्ली/प्रियंवदा सहाय Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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घरेलू हिंसा करने वालों को सबक सिखाने के लिए अब गली-मोहल्ले में विशेष अहिंसा दूत नियुक्त किए जाएंगे। ये दूत हिंसा किए बगैर समाज से महिला उत्पीड़न की समस्या को दूर भगाने का काम करेंगे। अहिंसा मैसेंजर के नाम से होने वाली इस नई नियुक्ति के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने खाका तैयार कर लिया है। प्रस्तावित योजना को इस वर्ष अमलीजामा पहनाया जाएगा।
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महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने अमर उजाला को बताया कि पहले पहल अहिंसा मैसेंजरों की खोज के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों की मदद ली जाएगी। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से 10-15 तेज तर्रार महिलाओं को चुनकर उन्हें अहिंसा मैसेंजर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। अहिंसा मैसेंजरों को अपने इलाके के बारे में पर्याप्त जानकारी होगी। इलाके में महिला उत्पीड़न की जानकारी होने पर पुलिस थाने के चक्कर काटे बगैर पीड़ित महिला को न्याय व अधिकार दिलाना अहिंसा मैसेंजरों का पहला प्रयास होगा। इसके लिए वे किसी महिला के साथ होने वाले घरेलू अत्याचार से समाज को रूबरू कराएंगी। बात नहीं बनने पर वे पुलिस, थाना, अस्पताल और गैर सरकारी संस्थानों की सहायता से भी उनकी मदद कर सकती हैं।

तीरथ ने कहा कि अहिंसा मैसेंजरों की पहली कोशिश यह होगी कि दोनों पक्ष आपसी समझौते से ही ऐसी समस्याओं का हल निकाल लें। बात नहीं बनने पर ये मैसेंजर कानूनी कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार करेंगे। इस काम के लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक रुप से मजबूत बनाने के साथ उचित पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि अहिंसा मैसेंजर बनाने का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग की महिलाओं को सुरक्षा मुहैया कराना है। ऐसी महिलाएं जो मदद के अभाव में घरेलू हिंसा झेल रही हैं, उन्हें न्याय दिलाने और उनका भविष्य संवारने के लिए रास्ता दिखाने का काम अहिंसा मैसेंजरों का होगा।

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