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हिन्दुत्ववादी प्रधानमंत्री होने से किसी को चिढ़ क्यों?

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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पांचजन्य के ताजा संपादकीय में आरएसएस ने सवाल उठाया है कि आखिर हिंदुत्ववादी पीएम से किसी को चिढ़ क्यों है। प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद मोदी की दावेदारी पर एक तरह से मुहर लगाते हुए आरएसएस ने कहा है कि अगर देश में बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों की चिंता करने वाली सरकार और प्रधानमंत्री बनता है तो इससे किसी को चिढ क्यों होनी चाहिए।
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देश के प्रधानमंत्री की सेकुलर पहचान होने संबंधी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद मोदी पर उनकी पार्टी जनता दल-यू के हमलों के बीच संघ ने सवाल किया है कि जब संविधान निर्माताओं ने ही प्रधानमंत्री को विशिष्ट पहचान देने की नहीं सोची, तो इस प्रकार के भ्रम फैलाने का औचित्य क्या है।
पांचजन्य में अपने ताजा संपादकीय के जरिए संघ ने कहा है कि हिंदुओं का उत्पीड़न कर सेकुलर राज स्थापित किए जाने को तत्पर इन नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि भारत में बहुसंख्यक हिंदुओं के हितों की चिंता करने वाली सरकार और प्रधानमंत्री क्यों नहीं होना चाहिए। ऐसा शासन और ऐसा प्रधानमंत्री निश्चिय ही हिंदू जीवन मूल्यों, संस्कारों और आदर्शों से प्रेरित होकर सभी मत, पंथों के हित चिंतन एवं उत्कर्ष के लिए कार्य करेगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले संघ सरसंघचालक मोहन भागवत भी मोदी के समर्थन में खुलकर आए थे और उन्होंने सेकुलर प्रधानमंत्री की नीतीश की मांग पर चोट की थी। हालांकि पांचजन्य के ताजा संपादकीय में संघ ने कहीं भी मोदी या नीतीश कुमार अथवा जदयू का जिक्र नहीं किया। लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हिंदू विरोधी होने के आरोप जरूर लगाए हैं।
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