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ऑपरेशन माही: किसी भी क्षण बाहर आ सकती है बच्ची

गुड़गांव (मानेसर)/ब्यूरो Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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सेना के जवान करीब 65 घंटों से बोरवेल में फंसी माही को बचाने के काफी करीब पहुंच गए हैं। बचाव टीम माही तक पहुंचने के लिए अंतिम बाधा चट्टान को काटने में जुटी है। बचावकर्मियों को उम्मीद है कि किसी भी क्षण माही दुनिया के सामने होगी। फिलहाल पाइप के जरिए माही को ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।
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बचाव कार्य में जुटी सेना और लोगों को उम्मीद है कि माही अभी भी जिंदा है, हालांकि लोगों की जुबान पर अनहोनी के कयास भी हैं। बोरवेल में डाले गए सीसीटीवी कैमरे के जरिए माही की जो तस्वीर मिली है उसमें बच्ची का हाथ दिख रहा है मगर वहां कुछ हरकत नजर नहीं आई।

माही को बचाने के लिए शुक्रवार को बोरवेल के समानांतर खोदे गए गड्ढे से नीचे उतरा सैनिक दो बार दिशा भ्रम के कारण भटक गया था। इसके बाद दिल्ली से ग्राउंड पैरिकेटिंग राडार मशीन मंगवाई गई, ताकि सही दिशा में खुदाई की जा सके।

बृहस्पतिवार रात तक सेना के जवानों ने पाइलिंग मशीन के जरिए लगभग 75 फीट गहरा गड्ढा खोद लिया था। इसके बाद असली मेहनत शुरू हुई, जब बोरवेल के ठीक नीचे की दिशा में खुदाई शुरू करनी थी। राडार की मदद से माही की स्थिति का सही अंदाजा लगाया जा सकेगा। बोरवेल के अंदर पाइप के जरिए ऑक्सीजन भेजी जा रही है। वहां से कार्बनडाइऑक्साइड निकालने के लिए भी अलग से पाइप डाला गया है।

बचाव के काम में सेना, फायर विभाग, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के 100 से अधिक अधिकारी लगे हुए हैं। गुड़गांव रैपिड मेट्रो भी बचाव कार्य में जुटी हुई है। गुड़गांव के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बच्ची को सही सलामत बाहर निकालने के लिए कोशिशें जारी हैं। इस सिलसिले में सभी निर्देश दे दिए गए हैं।

इस लापरवाही (बोरवेल को खुला छोडने) के लिए जो कोई भी जिम्मेदार है, उसके खिलाफ केस तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि माही बुधवार रात 11 बजे बोरवेल में गिर गई थी।

बच्ची को बचाने के काम में चट्टानों ने बड़ी बाधा खड़ी कर दी थी। बोरवेल और उसके साथ खोदे गए गड्ढे को आपस में जोड़ने के दौरान ये चट्टानें सामने आईं। इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है।--पीसी मीना, डिप्टी कमिश्नर

बच्ची के लिए दुआ करें।

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