संतों की मौजूदगी से गंगामय हुआ जंतर-मंतर

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
Protesters-demand-clean-Ganga,-Yamuna
गंगा की अविरलता को लेकर सोमवार को जंतर-मंतर पर बैठे जल तपस्वियों के विभिन्न रूप देखे गए। दो माह से जल का परित्याग किए दो तपस्वी मंच पर मौजूद थे। यहां नाग नाथ बाबा और औघड़ ब्रह्मरंद को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती रही। महासंग्राम के समापन पर इन्हें जल पिलाकर इनकी तपस्या खत्म करवाई गई।

'गंगा के अविरल होने तक करेंगे प्रदर्शन'
जंतर-मंतर पूरी तरह गंगामय हो गया। हजारों स्त्री-पुरुष विभिन्न जगहों से कलश लेकर पहुंचे थे। वहीं साधु-संत ‘गंगा मां का ये अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ समेत अनेक नारे लगा रहे थे। प्रदर्शन स्थल पर बुर्जुग साधु-संत से लेकर बाल संत भी काफी तादाद में मौजूद थे। सब ने संकल्प लिया कि जब तक गंगा को अविरल नहीं किया जाता, जब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।

रामलीला मैदान में होगा अगला प्रदर्शन
गंगा मुक्ति महासंग्राम के दौरान मंच पर सभी धर्मों के धर्माचार्य देखे गए। मुस्लिम व जैन धर्माचार्यों ने गंगा की निर्मलता के लिए जान की बाजी तक लगा देने का ऐलान किया। गंगा सेवा अभियानम् के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी तो जंतर-मंतर से इसकी शुरुआत की गई है। मांगे नहीं मानने पर तीन माह बाद फिर साधु-संत रामलीला मैदान में जुटेंगे।

छह प्रस्ताव पारित
-गंगा पर कोई बांध न बनाया जाए
-गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए राष्ट्रीय कानून बनाया जाए
-गंगा के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय बनाया जाए
-गंगा बेसिन की तटीय भूमि माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराई जाए
-एक भी नाला गंगा में न गिरने दिया जाए
-गंगा की भूमि का डिमार्केशन किया जाए

पीएमओ के पत्र में शिष्टाचार का अभाव
जंतर मंतर पर हुए गंगा मुक्ति महासंग्राम में पीएमओ की ओर से शंकराचार्य को भेजे गए पत्र की खूब चर्चा रही। पीएमओ में राज्यमंत्री नारायण सामी के हस्ताक्षर युक्त पत्र में शिष्टाचार की भाषा नहीं होने के लिए जिम्मेवार ठहराया गया। मंच से संबोधित किया गया कि पत्र में उचित संबोधन का अभाव है। हम जब आपको पत्र लिखते है तो आपकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए ही संबोधित करते है। इससे तो विश्वास नहीं होता कि यह पत्र आपके द्वारा प्रेषित है।

जजों से किया गया आह्वान
जंतर मंतर पर मंच से सभी जजों से साधु-संतों ने आह्वान किया कि वे गंगा को लेकर कठोर कानून बनाए। सरकार पर साधु-संतों में इस बात को लेकर नाराजगी दिखी कि ऐतिहासिक धरोहरों के नाम पर करोड़ों रूपए खर्च कर दिए जाते है, लेकिन गंगा की अविरलता के लिए सरकार की ओर से कोई खास कदम नहीं उठाया जाता। जबकि गंगा करोड़ो लोगों के लिए जीवनदायिनी है।

छत्तीसगढ़ ने सौंपा समर्थन पत्र
गंगा मुक्ति महासंग्राम में शंकराचार्य को छत्तीसगढ़ विधानसभा की ओर से समर्थन पत्र सौंपा गया। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समर्थन पत्र लेकर यहां पहुंचे थे। वहीं काफी तादाद में छत्त्तीसगढ़ से भी गंगा समर्थक जंतर मंतर पहुंचे थे।

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