शुद्ध पेयजल को वर्ल्ड बैंक देगा आर्थिक मदद

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ अब विश्व बैंक भी दूषित पेयजल से जूझ रहे राज्यों में शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक मदद करेगा।
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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल योजना के तहत विश्व बैंक से आर्थिक मदद की पेशकश की है। जिसे विश्व बैंक ने मंजूर कर लिया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार सहित देश के कुल आठ राज्यों में शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए विश्व बैंक 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद करेगा।
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के मुताबिक स्वच्छता एवं शुद्ध पेयजल योजना के लिए विश्व बैंक से आर्थिक मदद के प्रस्ताव को फौरी तौर पर मंजूरी मिल गयी है।
वित्त मंत्रालय ने इस आशय की सूचना दी है। इसके लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय जल्द ही योजना का मसौदा तैयार करेगा। जिस पर मार्च 2013 तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

रमेश के मुताबिक विश्व बैंक की मदद से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और मध्य प्रदेश के उन जिलों में इस योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। जहां अभी तक केंद्र व राज्य के स्तर पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं।

रमेश के मुताबिक मौजूदा समय यह सभी राज्य दूषित पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। दूषित पेयजल के चलते तमाम तरह की बीमारियां फैल रही हैं। जिसका ज्यादातर शिकार बच्चे हो रहे हैं। इसमें पश्चिम बंगाल की 1303, असम की 1000, बिहार की 940 और झारखंड में साहबगंज जिला आर्गनिक की समस्या से ग्रस्त है।

इसी प्रकार राजस्थान की 7500, कर्नाटक 2500, बिहार की 2700, मध्य प्रदेश की 2300 और पश्चिम बंगाल की 822 बसावटें फ्लोराइड की समस्या से जूझ रही हैं।

उत्तर प्रदेश की 2027 बसावटे, राजस्थान 19000, कर्नाटक 660 और उड़ीसा की एक हजार बसावटें खारापानी की समस्या से ग्रस्त हैं जबकि आयरन की समस्या असम, उड़ीसा, बिहार और त्रिपुरा आदि राज्यों में है।
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