राष्ट्रपति पद की दौड़ में लौट सकते हैं कलाम

संजय मिश्र/नई दिल्ली Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी को लेकर ममता बनर्जी के सस्पेंस और मुलायम सिंह की रणनीतिक चुप्पी ने सियासी गलियारे में कयासों की सुगबुगाहटें तेज कर दी हैं।
बंगाल को विशेष पैकेज पर बात नहीं बनने की स्थिति में इस संभावना को नकारा नहीं जा रहा कि ममता कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर नया दांव चल सकती हैं। पर्दे के पीछे सियासी हलकों में इस लिहाज से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की उम्मीदवारी को एक बार फिर से आगे बढ़ाने की कोशिशें हो सकती हैं।

तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के कलाम के हिमायती रहने के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए इस संभावना को नकारा नहीं जा रहा। राष्ट्रपति चुनाव की तेज हुई इस सरगर्मी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इसी हफ्ते सहयोगी और घटक दलों के साथ उम्मीदवारी को लेकर अंतिम दौर की चर्चा शुरू किए जाने की तैयारी है।

चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही सियासत का खेल चरम पर पहुंच गया है। ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने की एवज में बंगाल को आर्थिक पैकेज देने की सीधी शर्त रख दी है। सोमवार को ममता ने अपने दूत के तौर पर राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा को प्रणब के पास भेजा, लेकिन बैठक में पैकेज को लेकर सहमति नहीं बनी। हालांकि ममता पैकेज से कम पर मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

बंगाल पैकेज पर बात बनने तक ममता ने प्रणब दा की उम्मीदवारी पर तृणमूल के सस्पेंस को जारी रखने के संकेत दिए हैं। वहीं सोमवार को समाजवादी पार्टी ने भी ममता के इस दांव को देख कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान करने का फैसला टाल दिया। जबकि सपा संसदीय बोर्ड की बैठक इसीलिए बुलाई गई थी।

उम्मीदवार देखने के बाद ही समर्थन पर सपा का रुख साफ करने के मुलायम सिंह के बयान को सियासी गलियारे में ममता बनर्जी के साथ अंदरूनी जुगलबंदी के तौर पर देखा जा रहा है। इन दोनों की जुगलबंदी की वजह से ही कलाम की उम्मीदवारी को लेकर सियासत का बाजार दुबारा गरम होने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा रहा।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआती सरगर्मी के दिनों में सपा और ममता के बीच रणनीतिक खिचड़ी पकी थी, जिससे कलाम की उम्मीदवारी की चर्चाओं ने तेजी पकड़ी। मगर यूपीए के रणनीतिक मैनेजरों ने ममता और मुलायम को साधा तो यह मुहिम रुकी। हालांकि ममता ने फिर भी राष्ट्रपति चुनाव पर आगे सपा के साथ मिलकर कांग्रेस पर दबाव बनाए रखने की रणनीति छोड़ी नहीं। इसके लिए ममता ने अपने पिछले दिल्ली दौरे के दौरान मुलायम सिंह के घर जाकर उनसे मुलाकात भी की थी।

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