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परंपरा पर भारी पड़ा प्यार, संगीनों के साये में हुए फेरे

शामली (प्रबुद्धनगर)/ब्यूरो Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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फिल्मी पटकथा जैसा नजारा था। मंडप में फेरे पड़ रहे थे, बाहर पुलिस का पहरा था। संगीनों के साये में विदा हुई डोली। पुलिस ही दुल्हन को ससुराल तक छोड़ने गई। खाप के फरमान को दरकिनार कर आखिरकार नीरज और रेणु विवाह-बंधन में बंध गए। इस शादी पर घर वालों की रजामंदी थी, मगर खाप का पारा सातवें आसमान पर था। मामला उत्तरप्रदेश के प्रबुद्धनगर जिले का है।
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यहां भैंसवाल गांव के नीरज और गोहरनी की रेणु की परिवारों ने रजामंदी से 10 जून को विवाह होना तय हुआ था। तीन दिन पूर्व इनके परिजनों ने एसपी से मिलकर सुरक्षा की गुहार लगाते हुए बताया कि कुछ लोग खाप का खौफ दिखाकर उन पर शादी न करने का दबाव डाल रहे हैं और धमकी दे रहे हैं। खाप के अलंबरदारों का कहना है कि दोनों का रिश्ता भाई-बहन जैसा है, इसलिए शादी नहीं हो सकती।

एसपी से मिले सुरक्षा के भरोसे के बाद रविवार को शादी संपन्न कराने के लिए मंडप के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई। दोनों के निकट संबंधियों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में शादी की रस्में पूरी होने के बाद दोपहर करीब तीन बजे दुल्हन की विदाई हुई। दुल्हन की कार के पीछे कोतवाली पुलिस की जीप थी। कोतवाली थाना खत्म होते ही गढ़ीपुख्ता थाने की पुलिस उनके साथ हो ली। रेणु को ससुराल भैंसवाल गांव तक पहुंचाया गया। यहां भी सुरक्षा में पुलिस डटी रही। विवाह के बाद पुलिस ने दूल्हे-दुल्हन के बयान दर्ज किए। उन्होंने कुछ लोगों के नाम भी बताए। दोनों के परिजनों से भी पुलिस ने पूछताछ की।

खाप इन्हें अपना बच्चा ही समझे : परिजन
दूल्हे के पिता धर्मपाल सिंह, दुल्हन के पिता मेषवीर और मां कमला ने बताया कि वे खाप का सम्मान करते हैं, लेकिन जब दोनों बच्चे साथ रहना चाहते हैं तो इसमें वे भी खुश हैं। बच्चों की खुशी में ही बड़ों की खुशी होती है, इसलिए खाप वालों को भी इन्हें अपना बच्चा मानना चाहिए।

बाहर जाकर रहें, कोई एतराज नहीं : खाप
गढ़ीपुख्ता। विवाह के बाद भैंसवाल गांव में बत्तीसा खाप के लोगों की बैठक में कहा गया कि उन्होंने परंपरा को तोड़ा है। समाज उन्हें भाई-बहन ही मानेगा। गांव में उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और हुक्का-पानी बंद होगा, कोई इनकी मदद नहीं करेगा। यदि वे बाहर जाकर रहते हैं तो समाज को कोई एतराज नहीं है। पंचायत में चौधरी बलजोर सिंह बचन दास, सुबोध, अनंगपाल, रामधन, भगवानदास, सुरेंद्र आदि थे।

समाज के साथ हैं : सूरजमल
बत्तीसा खाप के चौधरी सूरजमल ने कहा कि खाप की यह परंपरा सालों से चली आ रही है, जिसका वे पालन करा रहे हैं। इस शादी के मामले में वे ज्यादा नहीं कहेंगे। उनका समाज जो निर्णय लेगा उसका वह समर्थन करेंगे।

जोर जबर्दस्ती नहीं होने देंगे : एसपी
एसपी किरण एस कहते हैं कि शादी समारोह के बाद दुल्हन अपने ससुराल चली गई है। सब कुछ शांति से हो गया है। गांव में किसी को माहौल खराब नहीं करने दिया जाएगा। यदि कोई जोर जबर्दस्त करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

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