उप्र स्थानीय निकाय चुनाव को SC की हरी झंडी

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को राहत देते हुए राज्य के स्थानीय निकायों के अध्यक्षों का चुनाव रोकने से सोमवार को इंकार कर दिया। यह चुनाव चार चरणों में 20 जून से शुरू हो रहा है। लेकिन न्यायालय ने इसके साथ एक शर्त जोड़ दी है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर की पीठ ने हालांकि कहा कि चुनाव परिणामों की घोषणा, 63 प्रतिशत अध्यक्ष पदों को अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्गो तथा महिलाओं के लिए के लिए आवर्ती आधार पर आरक्षित किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर आने वाले फैसले पर निर्भर होगी।

न्यायालय ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए उसे अगस्त के दूसरे सप्ताह में सुनवाई हेतु सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता राकेश गौतम ने तर्क दिया है कि अध्यक्ष पद को आरक्षित श्रेणी में रखा जाना स्थानीय निकायों के संविधान के खिलाफ है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पहली जून के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि यद्यपि आरक्षण सम्बंधी 23 मई की अधिसूचना दोषपूर्ण थी, लेकिन चुनाव को रोका नहीं जाएगा, क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग की 25 मई की अधिसूचना के बाद चुनावी प्रक्रिया जोर चुकी है।

चार चरणों में होने वाले इस चुनाव में स्थानीय निकायों के 740 अध्यक्षों का निर्वाचन होगा। इसमें से 63 प्रतिशत सीटें चार श्रेणियों के लिए आरक्षित हैं।

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