जमीनी स्तर पर दिखेगा काम तभी मिलेगा राज्यों को धन

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
Funds-will-only-work-at-ground-level

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
योजना क्रियान्वयन के नाम पर कागजी खानापूर्ति करने वाले राज्यों को अब केंद्रीय योजनाओं की धनराशि से हाथ धोना पड़ सकता है।
विज्ञापन

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का दो टूक कहना है कि जो राज्य समय से योजनाओं का पैसा खर्च करेंगे और जमीनी स्तर पर काम दिखाई देगा, वही राज्य अगली किश्त के हकदार होंगे। न सिर्फ जल प्रबंधन बल्कि ग्रामीण विकास मंत्रालय की अन्य सभी योजनाओं पर राज्यों को गंभीरता से काम करना होगा। योजनाओं के तहत आवंटित धनराशि को अब सिर्फ दो किश्तों में दिया जाएगा। पहली किश्त का सौ फीसदी उपयोग होने के बाद ही दूसरी किश्त जारी होगी।
एकीकृत जल प्रबंधन पर आयोजित राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के सम्मेलन में जयराम ने बताया कि देश में कुल 32 करोड़ हेक्टेयर भूमि में से लगभग 40 फीसदी यानी 11.50 करोड़ हेक्टेयर भूमि बंजर, मरुस्थल और सूखाग्रस्त है। इस भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार पिछले तीन दशकों से विभिन्न योजनाएं चला रही है।
इसके बावजूद महज दस फीसदी जमीन ही उपजाऊ और हरी-भरी हो सकी है जबकि राज्यों की ओर से पेश किए गए कागजी दावों में 56 फीसदी भूमि उपजाऊ हो चुकी है। हालांकि कोई भी राज्य अपने किए गए दावे को सिद्ध नहीं कर सका है। मतलब साफ है कि राज्यों में योजनाएं और क्रियान्वयन का काम सिर्फ कागजों पर ही मजबूती से हो रहा है।

उन्होंने बताया कि अब कागजों पर काम मान्य नहीं होगा क्योंकि अब सेटेलाइट के जरिए निगाह रखी जा रही है। रही है। लिहाजा राज्यों को अब केंद्रीय योजनाओं के तहत आवंटित धन को जमीनी स्तर पर लगाना ही होगा।

सूखाग्रस्त, बंजर भूमि सुधार और मरुस्थलीय क्षेत्रों को उपजाऊ बनाने के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में 36000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र, बिहार सहित अन्य कई राज्यों ने पिछले वर्षों के दौरान जल प्रबंधन के क्षेत्र में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us