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नरेंद्र मोदी ने दिखाया जोशी को बाहर का रास्ता

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में भाजपा ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सिपाही संजय जोशी को शुक्रवार को पार्टी से बाहर कर दिया है। एक बार फिर साफ हो गया है कि मोदी के सियासी पराक्रम के आगे भाजपा हाईकमान असहाय है।
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मोदी की घेरेबंदी के दबाव में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पार्टी के दायित्व से मुक्त करने संबंधी जोशी का इस्तीफा मंजूर कर लिया। मोदी ने हाईकमान को जोशी को बाहर करने के लिए अल्टीमेटम दिया था। वैसे, इस इस्तीफे के बाद भाजपा में अंदरूनी युद्ध विराम होने की उम्मीद नहीं है।

यह भाजपा हाईकमान की बेबसी है कि जोशी ने गडकरी को दायित्व से मुक्त करने का पत्र भेजा था। मगर भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने प्रेस कांफ्रेंस कर जोशी को पार्टी से ही मुक्त करने का ऐलान कर डाला। लेकिन इसके कारणों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनसे इस्तीफा देने का आग्रह किया था। स्पष्ट है कि भाजपा नेताओं के बीच 2014 में नेतृत्व के वर्चस्व की लड़ाई में मोदी सब पर भारी हैं।

जबकि संजय जोशी ने ‘अमर उजाला’ से दो टूक कहा कि उन्होंने पार्टी के दायित्व से मुक्त करने का पत्र भेजा है। सदस्यता उन्होंने नहीं छोड़ी है। गौरतलब है कि मुंबई में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा देने के बाद भी वह चुनाव प्रबंधक के रूप में उत्तरप्रदेश के निकाय चुनाव का कामकाज देख रहे थे। मोदी को यह मंजूर नहीं था।

भाजपा के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार दिल्ली और अहमदाबाद में जोशी के समर्थन और मोदी के विरोध में लगाए गए पोस्टरों के बाद मोदी ने हाईकमान को चार दिन का अल्टीमेटम दे दिया था। मोदी ने धमकी दे दी थी कि जोशी को अगर पार्टी से बाहर नहीं किया गया तो वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे देंगे।

अपने दूसरे कार्यकाल पर औपचारिक मुहर से पहले गडकरी ने मोदी से पंगा नहीं लेना ही मुनासिब समझा। इसीलिए दो दिन पहले गडकरी ने अपने भरोसेमंद जोशी को बुलाकर पार्टी के दायित्व से मुक्त करने पर राजी कर लिया था। इसी योजना के तहत शुक्रवार को जोशी ने गडकरी को दायित्व मुक्त करने का अपना इस्तीफा भेज दिया। मगर प्रकाश जावडेकर ने तो कई कदम आगे जाकर संजय जोशी की पार्टी से ही छुट्टी का ऐलान कर डाला।

भाजपा की इस भीतरी जंग में संघ जोशी के साथ है क्योंकि वे लंबे अर्से तक इसके प्रचारक रहे हैं। इसीलिए माना जा रहा कि संघ भविष्य में जोशी को अहम भूमिका सौंप सकता है। वहीं भाजपा के भीतर भी नेताओं का एक धड़ा मोदी के आगे लगातार समर्पण को लेकर नाराज है। इसीलिए जोशी के इस्तीफे के बाद भी भाजपा में घमासान रुकेगा इसकी गुंजाइश कम ही है।

भाजपा के हाल पर कांग्रेस को अफसोस
कांग्रेस ने भाजपा के अंदर चल रही उठापटक पर अफसोस जताते हुए उसे आत्मचिंतन करने की नसीहत दी है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने संजय जोशी के भाजपा छोड़ने पर कहा कि यह उनका अंदरूनी मामला है, इसलिए वह टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन उसे आत्मचिंतन की जरूरत है। अल्वी ने कहा कि जनता ने भाजपा को राष्ट्रीय विपक्ष की भूमिका निभाने का मौका दिया था, लेकिन अफसोस कि आपसी लड़ाई में उलझे उसके नेता रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने में विफल रहे। अब वे अपनी पार्टी को दिन-प्रतिदिन खत्म करते जा रहे हैं।

मोदी की ‘गुगली’ पर फिर बोल्ड गडकरी
पंद्रह दिनों के भीतर यह दूसरा मौका है, जब मोदी की मांग की ‘गुगली’ ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को बोल्ड किया है। मुंबई में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहुंचने के लिए मोदी ने शर्त रखी थी कि पहले संजय जोशी कार्यकारिणी से इस्तीफा दें। तब गडकरी ने पार्टी को एकजुट दिखाने के लिए मोदी की मांग मानी थी। सूत्रों का कहना है कि अब दूसरी बार मोदी ने गडकरी को फिर अपनी मांग मानने पर मजबूर करके संकेत दिए हैं कि वह पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनकी दूसरी पारी का विरोध नहीं करेंगे।

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