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समुद्री जल स्तर बढ़ने से देश के तटों को खतरा

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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विश्व में जलवायु परिवर्तन की मार भारत के तटीय प्रदेशों पर भी पड़ने वाली है। आने वाले सौ सालों में समुद्र का जल स्तर बढ़ने जा रहा है और केरल के हरे भरे तटों तथा मुंबई के अनेक इलाकों का नक्शा बदलने वाला है।
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यही नहीं, पूर्वी तट पर गंगा, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और महानदी जैसी नदियों के डेल्टा भी समुद्री जल स्तर में वृद्धि से प्रभावित होंगे। इस कारण कृषि योग्य भूमि और उससे जुड़े भूखंडों का मानचित्र भी बदलेगा। एक सरकारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है।


जलवायु परिर्वतन का अध्ययन कर रही संयुक्त राष्ट्र की विशेष समिति को भेजी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 से लेकर 2100 के बीच में समुद्र का जल स्तर करीब 3.5 इंच से लेकर 34.6 इंच तक बढ़ने का अनुमान है। इसका असर तटीय भूमि, वहां की वनस्पति और जनसंख्या पर पड़ेगा।

देश के पश्चिमी समुद्री तट पर सबसे ज्यादा प्रभाव गुजरात में खंबात और कच्छ के साथ मुंबई और कोंकण तट तथा दक्षिण केरल पर होगा। इस रिपोर्ट को देश के 120 संस्थानों के 220 वैज्ञानिकों ने मिल कर किया है। इसमें कहा गया है कि समुद्र का जल स्तर बढ़ने से कुछ राज्यों को बड़े पैमाने पर आर्थिक और सांस्कृतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बढ़े समुद्री जल स्तर के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करने के लिए ये विशेषज्ञ 2004 में आई सुनामी से प्रभावित तमिलनाडु के नागापट्टनम समेत केरल के कोच्ची और ओड़िशा के पारादीप भी गए। उन्होंने कहा है कि समुद्री जल स्तर में वृद्धि का अलग-अलग इलाकों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। कहीं कम जल स्तर वृद्धि में भी अधिक भूमि जा सकती है और कहीं इसके विपरीत भी हो सकता है।

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