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राष्ट्रपति चुनाव: अभी तक चलीं अटकलें, अब गंभीर मंथन

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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राष्ट्रपति चुनावों को लेर कांग्रेस और भाजपा नीत गठबंधनों एंव गैर कांग्रेस व गैर भाजपा दलों की ओर से शुरुआती जुमलेबाजी का दौर थमता दिख रहा हैं। अब संभावना है कि तीनों राजनीतिक पक्ष अगले सप्ताह प्रत्याशियों के नामों को लेकर गंभीर मंथन में जुटेंगे।
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तीनों पक्षों की शुरुआती सक्रियता में इस शीर्ष संवैधानिक पद के लिए उभरे तीन नामों वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा को लेकर अब चुप्पी भारी होने लगी है और इसे राजनीतिक हलकों में गंभीर मंथन की पीठिका माना जा रहा है।


4 जून की बैठक में सामने आ सकता है नाम
4 जून को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए की ओर से कोई आधिकारिक नाम सामने आ सकता है। संभावना है कि भाजपा नीत विपक्षी गठबंधन राजग तथा कांग्रेस एवं भाजपा नीत गठबंधनों से अलग रहे दलों का तीसरा राजनीतिक पक्ष इसके बाद ही इस बारे में अपना रुख तय करेंगे।

किसी भी दिन जारी हो सकती है अधिसूचना
गौरतलब है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल खत्म होने में अब 60 दिन से भी कम समय शेष हैं और चुनाव आयोग अब किसी भी दिन इस चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर सकता हैं। चुनावों सुगबुगाहट में मुखर्जी, कलाम तथा संगमा के अलावा उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी का नाम लगभग समगीति से चलता रहा है।

मुखर्जी प्रबल दावेदार
चर्चाओं के पहले चरण में सबसे प्रबल तरीके से मुखर्जी का नाम सामने आया और आलम यह था कि संसद के बजट सत्र में 2012-13 के आम बजट तथा विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा नेता यशवंत सिंह सहित पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उसकी इस संभावित पदोन्नति पर उन्हें अग्रिम बधाई तक दे डाली थी।

तृणमूल कांग्रेस मुखर्जी की उम्मीदवारी से सहमत नहीं
हालांकि यूपीए में शामिल तृणमूल कांग्रेस मुखर्जी की उम्मीदवारी से सहमत नहीं है। इस पद के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पसंदीदा लोगों की सूची में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, एपीजे अब्दुल कलाम और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी शामिल हैं।

कलाम का नाम भी आगे
शुरुआती चर्चा में भाजपा की ओर से कलाम का नाम सामने आया, लेकिन राजग के प्रमुख घटक जद-यू ने इस एकतरफा घोषणा पर एतराज जता दिया। राष्ट्रपति के रूप में पहली बार कलाम की ताजपोशी के अभियान में अगुवा रही समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता मुलायम सिंह यादव ने एक राजनीतिक व्यक्ति को ही शीर्ष संवैधानिक पद सौंपने की जोरदार हिमायत कर एक बड़ा सवाल उठा दिया।

संगमा को नहीं मिला एनसीपी का समर्थन
इस दौर में तीसरा नाम उभरा संगमा का। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तथा तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने एक आदिवासी नेता को अगला राष्ट्रपति बनाने की हिमायत करते हुए उनका नाम आगे बढ़ाया। इसके बाद संगमा ने माकपा महासचिव प्रकाश करात एवं तीसरे राजनीतिक पक्ष में महत्वपूर्ण माने जाने वाले कई नेताओं से मुलाकात कर समर्थन जुटाने की कवायद शुरू की, लेकिन वह अपनी ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का समर्थन नहीं जुटा सके। यूपीए सरकार की घटक एनसीपी के शीर्ष नेता एवं कृषि मंत्री शरद पवार इस पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार का समर्थन करने की घोषणा कर चुके हैं।

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