सरकार नहीं मानी तो अदालत जाएगी बीसीआई

नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानूनी शिक्षा पर सरकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की रार न्यायपालिका में बड़े विवाद का रूप ले सकती है। प्रस्तावित कानून से अधिकार पर अतिक्रमण करने के बीसीआई के आरोप को मानव संसाधन मंत्रालय तूल नहीं दे रहा है। जबकि कानून मंत्रालय काउंसिल की ओर से उठाए गए मुद्दों पर उसे आश्वासन दे चुका है। बीसीआई की मानें, तो सरकार के पास उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान विधेयक लाने की कोई स्पष्ट वजह नहीं है। अगर इस मसले पर मनमानी की गई तो सरकार को अदालत में काउंसिल के हर सवाल का जवाब देना भारी पड़ेगा।
बीसीआई के प्रतिनिधि कानूनी शिक्षा एवं अधिवक्ता अधिनियम के नियमन में बदलाव किए जाने के प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ कानून मंत्री, मानव संसाधन मंत्री से मिल चुके हैं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं को भी बीसीआई की ओर से विरोध की लिखित जानकारी दी जा चुकी है। सूत्रों की माने तो यह मुद्दा काउंसिल की प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है। क्योंकि उसके पास एकमात्र यही एक ऐसा अधिकार है जिससे वह पूरे देश की कानूनी शिक्षा में हस्तक्षेप रखता है।

पहले भी सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया था। लेकिन काउंसिल के विरोध के बाद सरकार ने बेवजह की मुसीबत मोल न लेना ठीक समझा। बीसीआई का यह दावा है कि विधि संस्थानों के साथ उसने भारत की कानूनी शिक्षा का परचम विश्व स्तर पर लहराया है। सरकार अन्य विषयों की शिक्षा को ठीक से संभाल नहीं पा रही है। इसके बावजूद विधि शिक्षा के नियमन पर अतिक्रमण कर उसकी भी मिट्टी पलीद करना चाहती है।

बीसीआई के एक अधिकारी ने मानव संसाधन मंत्रालय को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महज कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए यह विधेयक लाया गया है। इसकी खिलाफत में काउंसिल के प्रतिनिधि संासदों और राजनेताओं से मिले हैं। यदि सरकार इस विधेयक को कानून का रूप देने में सफल हुई तो काउंसिल न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाएगी। जहां सरकार के पास इस विधेयक को लाने की कोई भी वजह बताना भारी पड़ेगा।

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