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अखिलेश के बजट में वादों को खाद-पानी, 2014 की फसल की तैयारी

लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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2012 के चुनावी वादे, 2014 के चुनाव की चुनौती, अल्पसंख्यकों की मिजाजपुर्सी और किसानों पर मेहरबानियां। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पहले बजट में यह तसवीर साफ दिखाई दी।
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बतौर वित्तमंत्री उन्होंने पार्टी के घोषणापत्र में किए लगभग सभी अहम वादे को पूरा करने का इरादा साफ तौर पर जताते हुए शुक्रवार को विधानसभा में कुल 2,00,110 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। राशि के लिहाज से यह प्रदेश का अब तक का सबसे बड़ा बजट है।

बसपा के हंगामे और वाकआउट केबीच मुख्यमंत्री ने अपना पहला बजट पेश करते हुए 2014 के लोकसभा चुनावों का भी ध्यान रखा है। मुख्यमंत्री ने नौजवानों और बेरोजगारों से किए चुनावी वादे को पूरा करते हुए 2012-13 के बजट में बेरोजगारी भत्ता देने के लिए जहां 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, वहीं इस साल 10वीं और 12वीं पास करने वाले छात्रों को टैबलेट और लैपटॉप बांटने के लिए कुल 2,721 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

मुसलमानों को बजट में खास तवज्जो मिली है और उनसे जुड़ी योजनाओं को अब तक की सर्वाधिक रकम 2,074करोड़ रुपये मिली है। वहीं, किसानों के कर्ज माफी के वादे को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है, तो गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी की गई है। भूमि सेना योजना पुनजीर्वित की जाएगी। गरीब महिलाओं को दो-दो साड़ी और बुजुर्गों को एक-एक कंबल देने के लिए भी 200 करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र को भी प्राथमिकता में शुमार रखा है। शिक्षा-विस्तार के साथ गुणवत्ता में सुधार के लिए इस मद में पिछले साल के मुकाबले 17 फीसदी का इजाफा करते हुए कुल 33,263 करोड़ की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वित्तवर्ष चूंकि 2012-17 की बारहवीं योजना का पहला साल है लिहाजा कुल 13,650 करोड़ रुपये की 280 योजनाएं बनाई गई हैं।

प्रदेश में सड़क, पुल, सिंचाई और ऊर्जा के लिए कुल 23,591 करोड़ का आवंटन किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में सात फीसदी ज्यादा है। बिजली की नई योजनाओं के लिए अलग 585 क रोड़ का प्रावधान में बजट में है। साथ ही, समाज कल्याण योजनाओं के लिए बजट में 14,950 करोड़ की व्यवस्था की गई है। यह पिछली बार से 15 फीसदी ज्यादा है।

अल्पसंख्यक कल्याण के बजट में 81 फीसदी इजाफा
सपा सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण को बजट में सबसे अधिक तरजीह दी है। प्रदेश केकब्रिस्तानों को चहारदीवारी से घेरने के वादे को पूरा करने समेत दूसरी अन्य अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के लिए बजट के आकार में सबसे अधिक 81 फीसदी का इजाफा करते हुए 2,074करोड़ की व्यवस्था की गई है।

नहीं घटाया पेट्रोल से वैट
अखिलेश यादव के पहले बजट में कोई नया कर तो लगाया नहीं है लेकिन पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से परेशान यूपी के लोगों को वैट में कमी कर राहत देने की कोशिश से किनारा किया गया है। अपने भारी भरकम चुनावी वादों को पूरा करने के लिए भारी धन की जरूरत ने शायद सरकार के हाथ रोक लिए। बाद में इस बारे में पत्रकारों के सवाल पर भी मुख्यमंत्री साफ-साफ जवाब देने से बचते नजर आए।

यश भारती सम्मान हुआ 11 लाख का
मुख्यमंत्री ने प्रदेश केसबसे बड़े पुरस्कार यश भारती सम्मान की रकम बढ़ाकर 11 लाख रुपये कर दी है। यह राशि अभी तक 5 लाख रुपये थी। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करने वालों को सरकार यह सम्मान देती है। फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।

लोहिया के साथ जयप्रकाश और जनेश्वर मिश्र को सम्मान
मुख्यमंत्री ने बजट में समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया के नाम से शुरू की गई योजनाओं केलिए भारी-भरकम राशि के प्रावधान तो किए ही, जयप्रकाश नारायण की स्मृति में जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय केंद्र को मूर्त रूप देने के लिए भी बजटीय प्रावधान किया। साथ ही, लखनऊ में जनेश्वर मिश्र के नाम से एक विशाल पार्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा। पार्क में पर्यावरण और हरियाली का खास ख्याल रखा जाएगा।

जानिए वायदों की कीमत
अखिलेश यादव केपहले बजट का बड़ा हिस्सा वायदों को पूरा करने में खर्च होगा। साथ ही, मुलायम राज की कई योजनाओं को फिर से शुरू करने को भी हरी झंडी दे दी। मुलायम सिंह यादव ने अपने तीसरे शासनकाल में कन्या विद्या योजना, गरीब महिलाओं को साड़ी देने की योजना, भूमि सेना योजना शुरू की थी। इसे मायावती ने सत्ता में आते ही बंद कर दिया था। मुलायम सिंह ने कलाकारों को सम्मानित करने के लिए पांच लाख का यश भारती सम्मान शुरू किया था। इसे बंद कर कांशीराम सम्मान शुरू किया गया था। अब यश भारती सम्मान बड़ी राशि के साथ फिर अस्तित्व में आ गया है।

प्रदेश में आर्थिक विकास का वातावरण बनाने की कोशिश की जा रही ताकि बाहर से पूंजी निवेश को आकर्षित किया जा सके। यूपी जो कभी देश का अग्रणी प्रदेश हुआ करता था पिछले पांच साल में अन्य प्रदेश की तुलना में पिछड़ गया है। इसे दोबारा विकास के रास्ते पर लाने की सोच के साथ तेजी से आगे ले जाना है।--अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री, उत्तरप्रदेश

49 पृष्ठों का बजट भाषण केवल आंकड़ों का मकड़जाल है। समग्र विकास का कोई खाका इसमें नहीं दिखता। कृषि क्षेत्र सुधारने, नौजवानों को रोजगार, छात्रों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने और कानून व्यवस्था की स्थिति को सुधारने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है। किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाने और खेती में उनकी रुचि बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। पेयजल के लिए 40 हजार हैंडपंप लगाने की बात तो कही गई है पर उसके लिए धन का आवंटन नहीं किया गया है। छात्र-छात्राओं को लैपटाप देने के लिए प्रावधान किया है, पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कोई प्रस्ताव नहीं है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान अव्यवहारिक है।- हुकुम सिंह, भाजपा विधानमंडल दल के नेता

बजट निराशाजनक व करोड़ों लोगों की आशाओं पर तुषारापात करने वाला है। अपने वादों को पूरा करने के प्रति भी सपा ईमानदार नहीं है। बेरोजगारी भत्ते के नाम पर 1100 करोड़ का प्रावधान किया है। इस धनराशि से भत्ते की उम्मीद लगाए 5 फीसदी नौजवानों को भी भत्ता नहीं मिल पाएगा। लैपटाप व टेबलेट देने की घोषणा भी खोखली है। पूर्वांचल व बुंदेलखंड के आवश्यकतानुसार प्रावधान नहीं है। पश्चिमांचल के सुधार को बजट में जिक्र नहीं है।- प्रमोद तिवारी, कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता

खास वादे--प्रावधान (करोड़ रुपये)
कन्या विद्या धन: 446.35
कृषक दुर्घटना बीमा योजना: 350.00
भूमि सेना: 47.83
कब्रिस्तान व अंत्येष्टि स्थल पर चारदीवारी के निर्माण: 200.00
गरीब मुस्लिम बालिकाओं की पढ़ाई या शादी के लिए: 100.00
रिक्शाचालकों को मुफ्त अत्याधुनिक रिक्शे देने की योजना: 100.00
शहरी गरीबों के लिए आवास योजना आसरा: 100.00
नया सवेरा नगर योजना: 241.00
बुनकरों के कर्ज माफ: 50.00
लोहिया ग्रामीण आवास योजना: 395.00
महिलाओं को साड़ी व बुजुर्गों को कंबल: 200.00
किसानों का कर्जा माफ: 500.00

योजनाओं के बदले नाम
उप्र मुख्यमंत्री महामाया आर्थिक मदद योजना को बंद कर उसकी जगह रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना शुरू की गई है। इसके लिए बजट में 1111.85 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसी तरह अंबेडकर ग्राम सभा योजना बंद कर उसकी जगह राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना शुरू की गई है। इसमें 720 करोड़ रखे गए हैं।

सेक्टरवार प्रावधान
इन्फ्रास्ट्रक्चर: 23,591.72 करोड़ रुपये
कृषि व संबद्ध सेवाएं: 5,432.37 करोड़ रुपये
शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार: 33263 करोड़ रुपये
समाज कल्याण योजनाएं: 14,950 करोड़ रुपये
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाएं: 2,074करोड़ रुपये
चिकित्सा व स्वास्थ्य: 7,033.86 करोड़ रुपये

प्राइम नंबर:
--2,00,110 करोड़ रुपये का कुल बजट, अब तक के सबसे बड़े आकार का बजट
--3,323 करोड़ रुपये के घाटे का बजट
--1,100 करोड़ रुपये बेरोजगारी भत्ता देने के लिए
--2,721 करोड़ रुपये 10वीं और 12वीं के छात्रों के टैबलेट और लैपटॉप के लिए
--446.35 करोड़ रुपये कन्या विद्या धन योजना के लिए
--500 करोड़ रुपये किसानों की कर्ज माफी योजना के लिए
--350 करोड़ किसान दुर्घटना बीमा योजना के लिए
--400 करोड़ रुपये गन्ना किसानों केबकाया चुकाने के लिए

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