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अंडमान के जारवा जनजाति के क्षेत्र में प्रवेश पर रोक

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
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अंडमार निकोबार द्वीप समूह में रह रहे जारवा जनजाति के मूल आदिवासियों के क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। इस क्षेत्र में पर्यटक भी नहीं जा सकेंगे। सरकार ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह संशोधन विनियम 2012 को लागू कर दिया है। बृहस्पतिवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान के अनुच्छेद 240 के अंतर्गत इस संशोधन विनियम को मंजूरी दे दी। यह विनियम पूरे संघ शासित अंडमान निकोबार द्वीप समूह में लागू होगा।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन आदिवासियों के निवास क्षेत्र के पांच किमी. दूर तक के इलाके को बफर क्षेत्र घोषित किया गया है। इस परिधि में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार का उद्देश्य यहां के मूल आदिवासियों को अनुचित बाहरी प्रभाव से बचाना है। आरक्षित क्षेत्र में अनाधिकृत प्रवेश करने वालों के खिलाफ जुर्माने के साथ सरकार ने तीन से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया है।

सोनी ने बताया कि संघ शासित प्रशासन ने 30 अक्तूबर 2007 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें जारवा जनजाति संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर पांच किमी. व्यास क्षेत्र को बफर घोषित किया गया था और उसमें सभी प्रकार की व्यवसायिक और पर्यटन गतिविधियों पर पाबंदी लगायी गई थी, लेकिन कोलकाता उच्च न्यायालय ने इस अधिसूचना को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि मुख्य विनियम केवल आरक्षित क्षेत्र के लिए अधिसूचना की अनुमति देता है। उसमें किसी क्षेत्र को बफर क्षेत्र घोषित करने का कोई प्रावधान नहीं है। कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी जो अभी भी विचाराधीन है।

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