आरुषि कांड: नूपुर तलवार की जमानत नामंजूर

इलाहाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
Arushi-murder-case-Nupur-Talwar’s-bail-plea-rejected
ख़बर सुनें
आरुषि-हेमराज हत्याकांड के आरोपी तलवार दंपति की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद डॉ. नूपुर तलवार का जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एके त्रिपाठी ने सीबीआई और नूपुर के अधिवक्ता की जिरह को सुनने के बाद दिया है। करीब एक माह से जेल में नूपुर जेल में बंद हैं।
विज्ञापन

सीबीआई की ओर से दी गई दलील कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के मुताबिक जिस व्यक्ति के घर में कोई हत्या हो जाती है उसका कर्तव्य होता है कि वह घटना के बारे में पुलिस को अवगत कराए। मगर तलवार दंपति ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने न तो आरुषि की हत्या की पुलिस को जानकारी दी और न ही जांच में सहयोग ही किया। अदालत ने जिरह सुनने के बाद जमानत प्रार्थनापत्र नामंजूर कर दिया।
जमानत पर बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि तलवार दंपति के खिलाफ सीबीआई के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। किसी के खिलाफ सीधा साक्ष्य भी नहीं है। जिस गोल्फ स्टिक से हत्या करना बताया जा रहा है उसकी भी कोई प्रमाणिकता सीबीआई साबित नहीं कर सकी। तलवार दंपति का नार्को, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया गया मगर उसकी रिपोर्ट से कुछ नहीं निकला। गवाहों के बयान काफी विलंब से दर्ज किए गए हैं।
सीबीआई ने इसके विरोध में कहा कि हत्या की सारी परिस्थितियां और हालात तलवार दंपति की ओर इशारा कर रहे हैं। घटना की रात बाहर का कोई व्यक्ति घर के भीतर नहीं आया। आरुषि के कमरे में इंटरनेट राउटर पौने चार बजे बंद किया गया इसका अर्थ है कि घर का ही कोई व्यक्ति उस रात कमरे में गया।

हेमराज की लाश टेरस पर ले जाने के बाद टेरस के दरवाजे पर ताला बंद किया गया जबकि पहले उसमें कभी ताला बंद नहीं होता था। बाहरी हत्यारा कत्ल के बाद इतने एहतियात नहीं बरतता। दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद न्यायालय ने प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us