आडवाणी के निशाने पर आए गडकरी

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
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भाजपा का अंदरूनी घमासान एक बार फिर सामने आ गया है। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एनडीए के भारत बंद के दिन अपने ब्लॉग में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के कई फैसलों की खुली आलोचना कर भाजपा की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। इससे आडवाणी और गडकरी के बीच जारी तनातनी बढ़ने के आसार हैं।
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भारत बंद के दिन आडवाणी की टिप्पणी से भाजपा असहज हो गई। इससे पहले गडकरी के फैसलों पर उंगली उठाते हुए आडवाणी ने कहा कि भाजपा को अंतरावलोकन की जरूरत है। यदि लोग यूपीए सरकार से नाराज हैं तो भाजपा से भी खुश नहीं हैं।
आडवाणी ने कमोबेश यही बात मुंबई में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी कही थी, लेकिन तब पार्टी ने इसे परिवार के बुजुर्ग अभिभावक की छोटों के लिए नसीहत बताकर मामला टालने की कोशिश की थी, लेकिन अब आडवाणी ने गडकरी के फैसलों पर खुली नाराजगी जताते हुए लिखा है कि इन दिनों पार्टी के भीतर उत्साहवर्धक मूड नहीं है।
आडवाणी ने खासतौर पर गडकरी के तीन फैसलों पर आपत्ति जताई है। एक तो उन्होंने बाबू सिंह कुशवाहा का बगैर नाम लिए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव परिणाम और भ्रष्टाचार के आरोपों में मायावती के पार्टी से निकाले मंत्रियों के भाजपा में स्वागत पर नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश के अलावा झारखंड व कर्नाटक के मामलों से निपटने के तौर तरीके जैसी घटनाओं ने भाजपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को कुंद किया है।

कुशवाहा को गडकरी की पहल पर ही भाजपा में लाया गया था। जबकि आडवाणी समेत कई वरिष्ठ नेता इसके विरोध में थे। इसी तरह माना जाता है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव में विवादित अंशुमान मिश्र को गडकरी का समर्थन मिला था। बाद में इस प्रकरण में गडकरी खेमे को झुकना पड़ा था।

दूसरी ओर आडवाणी ने संसद के बजट सत्र के दौरान भाजपा के प्रदर्शन पर सुषमा स्वराज और अरुण जेटली की प्रशंसा की है। खास बात यह है कि आडवाणी ने यह टिप्पणी ऐसे दिन की जब भाजपा समेत एनडीए पेट्रोल के दाम बढ़ाने के विरोध में भारत बंद में व्यस्त था। आडवाणी की टिप्पणियों ने एनडीए के भारत बंद से ज्यादा सुर्खियां बटोर लीं। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर भी इसे लेकर मीडिया के सवालों से असहज हो गए।

मैंने कोर ग्रुप की बैठक में भी कहा था कि यदि लोग आज यूपीए सरकार से नाराज हैं तो हमसे भी खुश नहीं हैं। यह स्थिति साफ संकेत है कि भाजपा को अब अंतरावलोकन की जरूरत है।--लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा नेता।
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