जनरल बिक्रम सिंह बने देश के नए सेनाध्यक्ष

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
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जनरल बिक्रम सिंह ने बृहस्पतिवार को देश के आर्मी चीफ का पद संभाल लिया है। लड़ाई की चतुर शैली में दक्षता के लिए ‘कमांडो डायगर’ से सम्मानित जनरल ब्रिकम सिंह 27 महीने तक इस पद पर रहेंगे।
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विवादों से घिरे निवर्तमान जनरल वीके सिंह की कुर्सी संभालने वाले बिक्रम सिंह के मुताबिक सेना के ऑपरेशन की ताकत बढ़ाना और अनुशासन को दुरुस्त करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उधर, नए सेनाध्यक्ष के पद संभालने के बाद मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि सेना में पिछले आठ महीने से जो कुछ हुआ वह भ्रम की वजह से उपजे असामान्य हालात थे और इनका यहीं अंत हो जाना चाहिए।
देश के 25वें सेनाध्यक्ष का पद संभालने से पहले जनरल विक्रम सिंह सेना की पूर्वी कमान की अगुवाई कर रहे थे। देश भर में कई महत्वपूर्ण ओहदों पर काम करने के अलावा जनरल सिंह जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में कई नाजुक मौके पर अहम कार्रवाइयों को अंजाम दिया है।
आतंकवाद के चरम पर रहने के दौरान उन्होंने कश्मीर में 15वें कोर के कोर कमांडर और घुसपैठियों का गढ़ माने जाने वाले अखनूर सेक्टर के 10वें डिवीजन में मेजर जनरल का पद संभाला। इन्होंने 31 मार्च 1972 को सिख लाइट इंफेंट्री डिवीजन में कमीशन लिया था।

बतौर सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह को सेना व मंत्रालय के बीच गुटबाजी और हथियारों की लॉबिंग करने वालों की समस्या से जूझना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इन्हीं समस्याओं को काबू करने की मुहिम में पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में विवादों से घिर गए थे।

इसके अलावा सुखना और आदर्श घोटाले जैसे भ्रष्टाचार की घटनाओं पर अंकुश लगाना भी नए जनरल की चुनौती होगी। सेना के आधुनिकीकरण और अनुशासन को अपनी वरीयता में रखने वाले जनरल सिंह के लिए अफसरशाही से तालमेल बिठाना भी परेशानी भरा हो सकता है।

यही वजह है कि जनरल सिंह के पद संभालते ही एंटनी ने मंत्रालय को साफ संकेत दे दिया है कि पिछले आठ महीने में जो कुछ हुआ उसे यहीं खत्म हो जाना चाहिए।

--जनरल बिक्रम सिंह: 25वें आर्मी चीफ
--उम्र: 59 साल
--सेना में करियर: 31 मार्च, 1972 को सिख लाइट इंफैंट्री से
--इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) से कमीशन प्राप्त किया
--डिफेंस सर्विसेस स्टॉफ कालेज, वेलिंग्टन से ग्रेजुएट
--सेना प्रमुख के पद पर 27 महीने (अगस्त 2014) तक रहेंगे
--आर्मी चीफ बनने से पहले कोलकाता स्थित पूर्व सैन्य कमान के कमांडिंग ऑफिसर रहे
--आतंकवाद के दौर में श्रीनगर स्थित 15वीं कोर के कोर कमांडर और अखनूर स्थित 10वीं डिवीजन में मेजर जनरल के रूप में तैनात रहे
--युक्ति और नेतृत्व के लिए जम्मू-कश्मीर राइफल्स गोल्ड मेडल और श्रीगणेश ट्राफी से सम्मानित किए जा चुके हैं
--इंफैंट्री स्कूल में ऑफिसर्स कोर्स के दौरान ‘कमांडो डैगर‘ और ‘बेस्ट इन टैक्टिस‘ ट्राफी से नवाजा गया
--बेलगाम में इंफैंट्री स्कील में कमांडो विंग के प्रशिक्षक की भूमिका निभाई
--कारगिल युद्ध के दौरान मिलिट्री ऑपरेशन डायरेक्टोरेट में तैनात रहे और युद्ध की प्रगति के बारे में मीडिया को जानकारी देने की जिम्मेदारी निभाई
--यूएस आर्मी वार कॉलेज, पेन्सिलवेनिया से उच्च कमांड का कोर्स
--संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में तीन बार महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं
--परिवार: पत्नी सुरजीत कौर और दो बेटे
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