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एक सप्ताह में तय हो जाएगा दिल्ली-यूपी सीमा विवाद

गाजियाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
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आधे अधूरे राजस्व रिकार्ड के सहारे दिल्ली-यूपी बार्डर मसला आखिरकार समाधान के करीब पहुंच ही गया। 1930 और 1875 के नक्शों के आधार पर 50 फीसदी से अधिक बार्डर की पैमाइश पूरी हो गई है। डिमार्केशन टीम एक सप्ताह में बाकी की पैमाइश को मुकाम तक पहुंचा देंगी। अब तक की पैमाइश के अनुसार लोनी रोडवेज बस अड्डा दिल्ली-यूपी का बार्डर होगा। हालांकि बस अड्डा यूपी की सीमा में ही रहेगा। दूसरी ओर दोनों राज्यों के अफसर पैमाइश पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। लगातार समीक्षाओं का दौर चल रहा है।
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मंगलवार को भी दिल्ली के कमिश्नर (राजस्व) की अध्यक्षता में दिल्ली में ही बैठक हुई। जिसमें दिल्ली और यूपी के डिमार्केशन से जुड़े अफसरों ने हिस्सा लिया। बार्डर के कुछ इलाकों के रिकार्ड को लेकर अभी तक दोनों राज्यों में सहमति नहीं पा रही है। दिल्ली उन इलाकों का फैसला 1895 के रिकार्ड मुताबिक करना चाहता है। जबकि यूपी 1930 के सिजरों के आधार पर। सहमति बनाने के लिए अधिकारी बीच का रास्ता तलाश रहे हैं।

बैठक में अब तक हो चुकी पैमाइश की समीक्षा की गई। यूपी का प्रतिनिधित्व गाजियाबाद के डिप्टी कलेक्टर केशव कुमार ने किया। एडीएम प्रशासन आरके शर्मा ने बताया कि एक्ट के मुताबिक सरहद का फैसला 1930 में हुए अंतिम बंदोबस्त के अनुसार ही किया जा सकता है। पुख्ता निशान खोजने के लिए जरूर दूसरे रिकार्ड का सहारा ले सकते हैं। पैमाइश अंतिम दौर में है। एक सप्ताह में डिमार्केशन पूरा हो जाएगा। बृहस्पतिवार को फिर दिल्ली के अधिकारियों के साथ बैठक होगी।

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