सूचीबद्ध कंपनियों को सेबी नहीं देगी और समय

Varun Kumar Updated Tue, 14 Aug 2012 01:59 PM IST
sebi will not give more time to listed companies
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बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने संकेत दिया है कि सूचीबद्ध कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियम के पालन के लिए जुलाई 2013 के बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंड पर आयोजित एक कार्यक्रम में सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत धारणा और तर्क है कि नए नियम के अनुपालन के लिए 2010 से तीन वर्ष के लिए दी गई समय सीमा कम है।
सिन्हा ने कहा कि नए नियम को पेश किए हुए लंबा समय गुजर चुका है। लेकिन अब तक इस ओर कुछ विशेष नहीं हो सका है। सिन्हा ने जुलाई माह के ताजा आकलन के आधार पर बताया कि सूचीबद्ध कंपनियों ने 32 हजार करोड़ रुपए के शेयर बिक्री के लिए सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों का पालन किया है।

उल्लेखनीय है कि सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वर्ष 2001 में न्यूनतम सावर्जनिक शेयरधारिता मानदंड के बारे में पहली दफा बात की थी। जबकि 2010 के अंत में सेबी ने यह नियम बनाया कि निजी कंपनियों की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता 25 फीसदी और सरकारी फर्म के लिए 10 फीसदी होगी।

साथ ही इस दिशानिर्देश को तीन वर्ष के अंदर अमल में लाने की बात कही गई। नए दिशानिर्देश के मुताबिक निजी कंपनियों के लिए इसके अनुपालन की समय सीमा जून 2013 है। जबकि पीएसयू के लिए अगस्त 2013 की समयसीमा तय की गई है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस दिशानिर्देश का पालन नहीं होने पर सेबी जुर्माने का प्रावधान भी करेगा? सिन्हा ने कहा कि अगर कोई कंपनी सेबी के नियमों का उल्लंघन करती है तो उस पर कार्रवाई के लिए पहले से ही प्रावधान है। बकौल सिन्हा मार्च 2012 तक 193 कंपनियां न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के अनुरूप नहीं थी। इसमें पीएसयू भी शामिल हैं। जबकि 125 निजी संस्थाओं की सार्वजनिक शेयरधारिता 20 फीसदी से कम थी। 1259 कंपनियों ने मार्च 2012 तक शेयरहोल्डिंग पैटर्न को प्रस्तुत नहीं किया था।

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