तीन महीने तक एनपीए रहने पर कंपनी हो जाएगी बीमार

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 01 Nov 2012 08:01 PM IST
company under npa three months will be sick
तीन महीने या उससे ज्यादा समय तक गैर निष्पादित संपत्ति रहने के बाद छोटी (माइक्रो एंड स्मॉल) कंपनियां बीमार इकाई घोषित हो जाएंगी। साथ ही बैंकों को कंपनियों के रिवाइवल के लिए बीमार घोषित होने के तीन महीने के अंदर ही उसकी प्रासंगिकता जांच कर रिपोर्ट देनी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को बीमार छोटी कंपनियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।

रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि कोई भी कंपनी यदि तीन महीने तक एनपीए वर्ग में रहती है, या फिर कंपनी के वाणिज्यिक उत्पादन में गिरावट आने से नेटवर्थ में 50 फीसदी तक या उससे ज्यादा की कमी आ जाती है वह बीमार घोषित हो जाएगी।

नए दिशानिर्देश के तहत आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वह किसी भी कंपनी के बीमार घोषित होने के बाद तीन महीने के अंदर उसके रिवाइवल की प्रासंगिकता हर हाल में जांच ले। रिजर्व बैंक ने इसके अलावा बैंकों को यह भी कहा है कि वह किसी भी कंपनी में बीमार होने के लक्षण का आभास होते ही उसके रिवाइवल के लिए काम करना शुरू कर दे।

रिजर्व बैंक ने इसे हैंड होल्डिंग स्टेज कहा है। हैंड होल्डिंग स्टेज के तहत यदि कोई कंपनी अपने वाणिज्यिक उत्पादन में छह महीने या उससे ज्यादा की देरी करती है, कंपनी को दो साल से घाटा हो रहा है, उत्पादन क्षमता तय स्तर से 50 फीसदी से कम पर काम कर रही है, तो बैंक को तुरंत कंपनी के रिवाइवल के लिए काम करना होगा। जिससे वह बीमार कंपनी न घोषित हो जाए। देश में इस समय 2.61 करोड़ छोटे औरमझोले उपक्रम हैं, जिसमें से 90 फीसदी से ज्यादा छोटे कारोबारी हैं।

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