तेल कंपनियां सरकारी बैंक से खरीदें डॉलर

Market Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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रुपये की भारी गिरावट को रोकने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों से कहा है कि वह अपनी डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के एक ही बैंक से खरीदारी करें। मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को कारोबारी सत्र में रुपया 57.33 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया।
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पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सचिव जीसी चतुर्वेदी ने एलपीजी पोर्टल का शुभारंभ करने के मौके पर कहा कि रिजर्व बैंक से इस संदर्भ में पत्र मिला है। तेल कंपनियां की डॉलर की जरूरत को पूरा करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से डॉलर खरीदने पर विचार किया जा रहा है। चतुर्वेदी ने कहा कि एक ही बैंक से डॉलर खरीदने से डॉलर-रुपये में आ रही भारी उठापटक को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की आयात जरूरत को पूरा करने के लिए सालाना 160 अरब डॉलर की आवश्यकता पड़ती है। जब एक ही बैंक से तेल कंपनियां डॉलर की खरीद के लिए संपर्क करेंगी, तो इस फायदा यह होगा कि दस बैंकों से इसकी पूछ परख का रुपये पर पड़ने वाले दबाव को रोकने में मदद मिलेगी।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के सीएमडी एसराय चौधरी ने कहा कि रिजर्व बैंक ने कंपनी को डॉलर की आधी जरूरत को पूरा करने के लिए एसबीआई से डॉलर खरीदने को कहा है। रिजर्व बैंक से मिले पत्र में कहा गया है कि कंपनी डॉलर की आधी खरीद विभिन्न बैंकों से प्रतिस्पर्धा निविदा के आधार पर कर सकती है। चौधरी ने यह नहीं बताया कि रिजर्व बैंक से उसे यह पत्र कब मिला है।

प्रमुख तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत का एक बड़ा हिस्सा एसबीआई से पूरा करती है। शेष डॉलर की पूर्ति कंपनी 16 बैंकों के पैनल के जरिये करती है। आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल घरेलू बाजार में डॉलर की सबसे बड़ी खरीदार हैं। यह तीनों कंपनियां माह में करीब सात अरब डॉलर खरीद करती हैं। रिजर्व बैंक के नई डॉलर खरीद प्रणाली के अमल में आ जाने से आईओसी माह में दो अरब डॉलर एसबीआई से खरीदेगी।

फिलहाल, कंपनी 80 करोड़ डॉलर एसबीआई से खरीदती है। कंपनी की मासिक डॉलर खरीद साढे़ तीन अरब डॉलर है। बीपीसीएल और एचपीसीएल सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक से डेढ़ अरब डालर की खरीद करेंगी, जबकि फिलहाल वह इसके लिए प्रतिस्पर्धी निविदा पर निर्भर रहती हैं।
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