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उत्पादन नहीं सुधरा तो और महंगी होगी चाय

Market Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
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असम और पश्चिम बंगाल में बारिश की कमी से कमजोर उत्पादन और पाकिस्तान को निर्यात बढ़ाने होने का खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ सकता है। आने वाले खपत के दिनों में घरेलू उपभोक्ताओं को चाय के लिए ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी। पिछले तीन महीनों के दौरान नीलामी केंद्रों पर चाय के दामों में दस फीसदी की बढ़त हुई है।
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इससे पिछले वर्ष के मुकाबले थोक बाजारों में चाय के दाम लगभग 15 फीसदी तक बढ़कर 170 रुपये से 225 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि यदि मानसून सीजन के दौरान उत्पादन में सुधार न हुआ तो अक्तूबर तक चाय के दाम 260 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक जनवरी से मई तक असम और पश्चिम बंगाल के उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी से चाय का उत्पादन पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 5.25 करोड़ किलो तक कम हुआ है। जनवरी से मार्च तक उत्पादन 1.25 करोड़ किलो कम रहा। जबकि, अप्रैल में 3 करोड़ किलो और मई में उत्पादन एक करोड़ किलो कम दर्ज किया गया है। उत्पादन में सर्वाधिक गिरावट असम के उत्पादक क्षेत्र में दर्ज की गई है। इसके चलते नीलामी केंद्रों पर चाय के दाम 40 से 50 रुपये किलो तक ऊंचे हो चुके हैं। यही नहीं कमजोर बारिश का असर चाय की गुणवत्ता पर भी पड़ा है। नीलामी केंद्रों से लेकर थोक बाजारों तक चाय की उम्दा क्वालिटी की भारी किल्लत है।
दिल्ली टी एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल जैन के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले घरेलू दाम ऊंचे होने के बावजूद पाकिस्तान की मांग अच्छी चल रही है। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए हुई व्यापारियों की सद्भावना बैठक में पाकिस्तान को चाय निर्यात करने के लिए बिक्री कर, उत्पाद शुल्क सहित कई अन्य करों को कम किया गया। इस कारण पाकिस्तान को भारत से चाय आयात सस्ता पड़ रहा है। यही कारण है कि पाकिस्तान ने इस वर्ष भारत से 17 करोड़ किलो चाय आयात की उम्मीद व्यक्त की है।

उद्योग के लिहाज से पाकिस्तान को बढ़ता निर्यात अच्छा है। लेकिन, घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका असर महंगी चाय के रूप में दिखना शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि जुलाई से अक्तूबर तक मानसून सीजन में उत्पादन में सुधार न हुआ तो अक्तूबर के बाद चाय की घरेलू कीमतों को तेजी के पर लग सकते हैं। जाहिर है कि पिछले वर्ष देश में चाय का उत्पादन 98 करोड़ किलो हुआ था जबकि मौजूदा उत्पादन के लिहाज से इस साल इसमें दस से 15 फीसदी तक गिरावट की आशंका बन गई है।
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