ऑटो व रीयल्टी को बिक्री गिरने का डर

Market Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में कटौती नहीं किए जाने पर कार निर्माताओं और रीयल एस्टेट कंपनियों ने भारी निराशा जताई है। उनका कहना है कि वह पहले से ही दबाव झेल रहे हैं।
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आगे भी ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने से उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ऑटो इंडस्ट्री को बिक्री के निगेटिव जोन में जाने का डर सता रहा है।
मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, जनरल मोटर्स, हीरानंदानी कंस्ट्रक्शंस और सीएचडी डेवलपर्स सहित कई कंपनियों का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती से आर्थिक विकास को गति देने में सहायता मिलती।
मारुति सुजुकी के प्रबंध कार्यकारी अधिकारी (सेल्स एंड मार्केटिंग) मयंक पारीक का कहना है कि नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखना ऑटो इंडस्ट्री के लिए निराशाजनक है। कार इंडस्ट्री के लिए यह बहुत जरूरी है कि ब्याज दरें नीचे आएं, क्योंकि 70 फीसदी बिक्री फाइनेंस के जरिए ही होती है।

उन्होंने कहा कि बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है। अब आगे भी मांग सुस्त रहेगी। इसी तरह की राय जाहिर करते हुए ह्यूंदै मोटर इंडिया के निदेशक (मार्केटिंग एंड सेल्स) अरविंद सक्सेना ने कहा कि जीडीपी की वृद्धि दर के नीचे आने से इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में नरमी लाएगा। लेकिन, इस परिप्रेक्ष्य में यह निराशाजनक साबित हुआ। तेल की ऊंची कीमतें के कारण ऑटो इंडस्ट्री पहले से ही भारी दबाव में है।

जनरल मोटर्स इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट पी. बालेंद्रन ने कहा कि ऊंची ब्याज दरों रहने के कारण बाजार में मंदी का दौर आगे भी बना रहेगा। इस बात का भी डर है कि बिक्री निगेटिव दायरे में जा सकती है।रीयल्टी कंपनियों ने भी रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा पर घोर निराशा जताई है।

सीएचडी डेवलपर्स के प्रबंध निदेशक गौरव मित्तल ने कहा कि प्रोडक्टिव सेक्टरों खासकर रीयल एस्टेट की दुर्दशा और फंडों की कमी को देखते हुए दरों में कटौती वरदान साबित हो सकती थी। इससे ग्रोथ को भी गति दी जा सकती थी।

हीरानंदानी कंस्ट्रक्शंस के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती की व्यापक संभावना थी। आर्थिक विकास को गति देने के लिए यह जरूरी था।

हाल ही में इंडियन मर्चेंट्स के प्रेसिडेंट बने हीरानंदानी ने कहा कि वित्त मंत्रालय को अब दखल देने और यह देखने की जरूरत है कि कहीं विकास दर डिप्रेशन में न चली जाए।
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