हवाई अड्डा शुल्क पर अजित सिंह चुप क्यों?

Market Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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हवाई टिकट पर सेवा कर लगाए जाने के खिलाफ नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने अपनी ही यूपीए सरकार को आड़े हाथ लिया है। लेकिन दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर भारी शुल्क लगाए जाने के मुद्दे पर वह चुप हैं। इसे निजी कंपनियों का दबाव माना जा रहा है। जबकि इसमें 346 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
सेवा कर और विमान ईंधन (एटीएफ) की ऊंची कीमतों को लेकर सिंह ने पिछले दिनों वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखा। उनका कहना है कि इससे हवाई सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले घरेलू यात्रा पर 100 रुपए तथा अंतरराष्ट्रीय यात्रा में पांच सौ रुपए सर्विस टैक्स लगता था, जो यात्रा टिकट के दस प्रतिशत से अधिक नहीं था। लेकिन पिछले दिनों इसे बढ़ा कर 40 प्रतिशत तक कर दिया गया।

इस तरह अजित सिंह सरकार के खाते में जाने वाले टैक्स को कम करने के लिए तो दबाव बनाए हैं। लेकिन हवाई अड्डों पर ली जाने वाली फीस पर चुप हैं। इस समय दिल्ली हवाई अड्डे पर यात्रियों से प्रस्थान और आगमन पर एडवांस डेवलपमेंट फीस (एडीएफ) और यूटिलिटी डेवलपमेंट फीस (यूडीएफ) वसूली जाती है। यह फीस पुरानी दरों के मुकाबले 346 प्रतिशत अधिक है।

इस तरह दिल्ली हवाई अड्डा दुनिया का सबसे महंगा हवाई अड्डा हो गया है। गौरतलब है कि दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डे निजी कंपनियों के पास हैं, लिहाजा इनके द्वारा वसूली जा रही फीस को कम करने के लिए कोई कोशिश नहीं हो रही। दिल्ली और मुंबई में डयल और मायल द्वारा वसूली जा रही फीस का मुद्दा बजट सत्र में भी उठा था। लेकिन मंत्री ने यह कह कर कि फीस बढ़ाने की जिम्मेदारी एयरपोर्ट रेग्यूलेटरी अथॉरिटी है, पल्ला झाड़ लिया।

हवाई अड्डों पर घरेलू यात्रियों से वसूले जाने वाले कर
500 किलो मीटर तक
अगमन पर : 231.40 रुपए
प्रस्थान पर : 195.80 रुपए
500 किलो मीटर से ऊपर
आगमन : 462.80 रुपए
प्रस्थान : 391.60 रुपए
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से वसूल की जाने वाली फीस
5000 किमी तक आगमन पर : 1,068 रुपए
प्रस्थान : 881.10 रुपए
2000 से 5000 किमी तक
आगमन : 845.50 रुपए
प्रस्थान : 699.17 रुपए

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