अर्थव्यवस्था के बिगड़े हालात से उद्योगों का भरोसा डगमगाया

Market Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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देश के बिगड़ते आर्थिक हालात से चिंतित उद्यमियों ने चालू वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी से भी कम विकास दर रहने की उम्मीद जताई है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। जबकि मंदी के मौजूदा दौर का सर्वाधिक असर गैर पेशेवर कामगारों पर पड़ने की आशंका जताई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने मंदी के खतरे को भांपते हुए हाल में अपने सदस्य कंपनियों के बीच सर्वे कराया है। जिसमें कॉरपोरेट जगत ने यह माना कि देश में बिगड़ते आर्थिक हालात से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा हो सकती है। खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन निर्वाह करने वालों के लिए भविष्य में सर्वाधिक कठिनाई पैदा हो सकती है।

सर्वे में शामिल 43 फीसदी उद्यमियों का कहना है कि वे गैर-कुशल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। जबकि ज्यादातर इनकी संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं। सीआईआई का कहना है कि देश में लाखों युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। ऐसे में कंपनियां रोजगार के विकल्प में कटौती करती हैं तो इससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी।

दूसरी ओर, 43 फीसदी कंपनियां घरेलू बाजार के मुकाबले विदेशों में निवेश बढ़ाने को इच्छुक हैं। उनका यह भी मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में उनके उत्पादों की बिक्री में कमी आएगी। सर्वे के नतीजों से सरकार को आगाह करते हुए सीआईआई के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी ने कहा है कि सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए हितकर कदम उठा सकती है।

मसलन अगले हफ्ते मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान प्रमुख ब्याज दरों में एक फीसदी की कटौती होनी चाहिए। जबकि देश के लिए महत्वपूर्ण 50 बड़ी परियोजनाओं के रास्ते के अड़चन को एक माह के अंदर दूर करने और उनका तेजी से क्रियान्वयन के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा सीआईआई ने नागर विमानन, रक्षा उत्पादन, मल्टीब्रांड रिटेल क्षेत्र में विदेशी निवेश की राह आसान करने की सलाह भी दी है।

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