कालीन के उधार निर्यात पर लगा प्रतिबंध

Market Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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केंद्र सरकार ने कालीन के उधार निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने इस बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी है। उधार निर्यात पर रोक लगाने के साथ ही वाणिज्य मंत्रालय ने कालीन व्यवसायियों को एक और राहत देते हुए उन्हें मिलने वाली बैंक ब्याज दर में दो प्रतिशत तथा निर्यात लाइसेंस पर सात प्रतिशत की सब्सिडी को बरकरार रखा है। माना जा रह है कि सरकार के इन कदमों से छोटे और मंझोले कालीन निर्यातकों को राहत मिलेगी। खासतौर पर मिर्जापुर के भदोही के कालीन उद्योग को इससे काफी राहत मिलेगी।

कालीन संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के अध्यक्ष सिंहनाथ सिंह ने कहा कि उधार निर्यात पर प्रतिबंध की मांग पिछले तीन साल से की जा रही थी। प्रतिबंध लग जाने के बाद मध्यम वर्ग के बारह सौ से अधिक उद्यमियों को काफी राहत मिलेगी। गला काट प्रतिस्पर्धा के बीच उधार में निर्यात के चलते में पांच सौ से अधिक कालीन निर्यातकों के करीब 800 करोड़ रुपये विदेशों में फंसे पड़े हैं। इसके चलते कई विदेशी कंपनियां तो खुद को दिवालिया तक घोषित कर चुकी हैं।

कालीन कारोबारियों का कहना है कि अमरीका, जर्मनी समेत यूरोपीय देशों में आर्थिक मंदी के कारण भारतीय कालीन निर्यातक अपनी पूंजी को लेकर पसोपेश में थे। प्रतिस्पर्धा के युग में उधार व्यापार का हिस्सा बन गया है। विदेशी खरीददार अक्सर उधार लेकर करोड़ों की रकम डकार जाते थे। कभी कभी भुगतान तीन-चार महीने के बजाय सालों बाद किया जाता था।

इससे पहले 1994 से 2004 तक उधार निर्यात पर प्रतिबंध था, जिसे केंद्र सरकार ने 2005 में हटा लिया था। एक बार फिर से प्रतिबंध लागू होने से उम्मीद है कि अब कालीन निर्यातक उधार के सौदों के दुष्चक्र में नहीं फंसेंगे।

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