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घड़ियों के कारोबार में 15 फीसदी सालाना तेजी

Market Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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देश के मध्यम वर्ग की आय में हो रही बढ़ोतरी और युवाओं में एक बार फिर से घड़ी के बढ़ते चलन के बीच 2020 तक देश के घड़ी कारोबार के मौजूदा 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।
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भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य मंडल (एसोचैम) की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार घरेलू स्तर पर घड़ी कारोबार में सालाना 15 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना है, जिसके चलते अगले पांच से सात वर्षों में इसके दोगुना होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक घड़ियों की खरीद में पुरुष महिलाओं से काफी आगे हैं।

अध्ययन के मुताबिक देश के संगठित क्षेत्र में अकेले घड़ी कारोबार की 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इसके अलावा गैर संगठित क्षेत्र की भी इसमें बड़ी हिस्सेदारी है। तेजी से विकास की ओर बढ़ते इस देश में 80 फीसदी आबादी 45 वर्ष से कम उम्र की है। ऐसे में इस कारोबार में सालाना औसतन 15 से 20 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं बनी हुई हैं।

इसमें मैकेनिकल, ऑटोमैटिक और क्वार्ट्ज तीनों ही तरह की घड़ियों की मांग में तेजी देखी जा रही है। सर्वाधिक मांग 500 रुपये से 5,000 हजार रुपये की घड़ियों की है, जिसका सालाना उत्पादन करीब 4.5 करोड़ है। इसके साथ ही दूसरे वर्ग में 5,000 रुपये से 25 हजार रुपये वर्ग की घड़ियों की मांग में भी अब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब भारत में अपने ब्रांडों को लेकर इस कारोबार पर छाने की तैयारी में हैं, जिससे घरेलू कंपनियों और स्थानीय कारोबारियों के लिए चुनौती पैदा हो गई है। घरेलू बाजार में बिकने वाले विदेशी ब्रांडों में स्विस कंपनी टिसॉट की बिक्री वर्ष 2010 में 50 हजार घड़ियों के सालाना के स्तर को पार कर गई।

इसके अलावा टैग ह्यूर, रेमंड वेल आदि कुछ ब्रांड भी काफी लोकप्रिय हुए हैं। दूसरी ओर भारतीय ब्राडों में टाइटन, टाइमेक्स इंडिया, मैक्सिमा, एचएमटी आदि भी अच्छा कारोबार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार घड़ियों की खरीद में पुरुष महिलाओं से कहीं आगे हैं। इसके बाद घड़ियों का सबसे बड़ा खरीदार वर्ग छात्रों का है। निकट भविष्य में कारोबार की प्रबल संभावनाओं को देखते हुए कई विदेशी कंपनियां अब चीन के बाद भारत को एक बढ़िया बाजार के रूप में देख रही हैं।

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