प्रधानमंत्री ने संभाली आर्थिक हालात सुधारने की कमान

Market Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को गति देने की कमान आखिरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संभाल ली है। जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट और सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए प्रधानमंत्री ने निवेश निगरानी समिति की स्थापना की है। समिति बड़ी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में होने वाली देरी को समाप्त करने का काम करेगी।
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समिति उन सभी सरकारी व गैर सरकारी परियोजनाओं पर निगरानी रखेगी, जिनकी लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है। सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं की निगरानी जहां राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतियोगिता परिषद करेगी। वहीं, निजी क्षेत्र की परियोजनाओं की निगरानी का काम वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग संभालेगा। दोनों ही निगरानी समितियां हर तीन महीने में कार्य की समीक्षा करके रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
नियम और कानून से नहीं होगा कोई समझौता
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को समाप्त करना है। सरकार के इस निर्णय से निवेश में तेजी आएगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। दरअसल, परियोजनाओं में हो रही देरी के पीछे भूमि अधिग्रहण मुख्य समस्या है। इसके साथ ही पर्यावरण, सुरक्षा सहित अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी परियोजनाओं की रफ्तार में बाधक बने हुए हैं। हालांकि, निगरानी समिति परियोजनाओं को गति देने के लिए किसी तरह के नियम व कानून का उल्लंघन नहीं करेगी। बल्कि इन मुद्दों को जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करेगी।

निवेश परियोजनाओं में देरी के कई कारण
इस व्यवस्था के जरिए परियोजनाओं में किसी भी देरी के लिए समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और समाधान के लिए विशिष्ट अथवा व्यवस्थित मामलों की पहचान की जाएगी। वित्तीय सेवा विभाग और राष्ट्रीय निर्माण प्रतियोगिता परिषद निगरानी किए गए मामलों की त्रैमासिक रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को देगी। रिपोर्ट में चिह्नित की गई खामियों को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय आवश्यक कार्रवाई करेगा।

दरअसल, विभिन्न कारणों से प्रमुख निवेश परियोजनाओं के कार्यान्वयन में होने वाली देरी का मामला पिछले वर्ष प्रधानमंत्री की व्यापार और उद्योग परिषद की बैठक में उठाया गया था। उस समय प्रधानमंत्री ने प्रमुख परियोजनाओं को गति देने के लिए उन पर विशेष निगरानी रखे जाने की आवश्यकता बताई थी। निवेश परियोजनाओं में देरी के लिए पर्यावरण, भूमि संबंधी मामले और सुरक्षा सहित अन्य कई बाधाओं जिम्मेदार ठहराया गया था।
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