ईरानियों को मिल सकता है भारतीय गेहूं

Market Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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लगभग डेढ़ दशक के लंबे इंतजार के बाद ईरानियों को भारतीय गेहूं के आटे से बनी रोटियों का स्वाद चखने का मौका मिल सकता है। रिकॉर्ड पैदावार को देखते हुए सरकार ने इस वर्ष गेहूं निर्यात का निर्णय किया है। इसके तहत निर्यात के बड़े बाजार के रूप में ईरान को देखा जा रहा है। ईरान को गेहूं निर्यात शुरू करने के लिए सरकार ने व्यापक नीति बनाई है। अगले सप्ताह भारत आ रहे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अपनाए गए उपायों के साथ ही हाल में उन्नत की गई प्रयोगशाला को भी दिखाया जाएगा।
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक करनाल बंट नामक बीमारी फैलने का खतरा बताकर ईरान ने वर्ष 1996 में भारत से गेहूं का आयात बंद कर दिया था। तब से लेकर आज तक ईरान में भारतीय गेहूं आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इस वर्ष देश में गेहूं की 902.30 लाख टन रिकार्ड पैदावार हुई है। साथ ही देश में भंडारण की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसे देखते हुए सरकार ने पहले चरण में 20 लाख टन गेहूं निर्यात करने का फैसला किया है। वहीं, ईरान में इस वर्ष गेहूं की पैदावार कम हुई है। ईरान की घरेलू खपत के मुकाबले उत्पादन 30 लाख टन कम है। इससे ईरान में भारतीय गेहूं निर्यात की बेहतर संभावना है।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश में अपनाए जा रहे गुणवत्ता नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उन्हें कृषि मंत्रालय में स्थिति आधुनिक प्रयोगशाला को भी दिखाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि अनाज की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अपनाए जा रहे उपायों की जानकारी के बाद ईरान भारतीय गेहूं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा लेगा। वैसे भी भारत पर ईरान से कच्चे तेल के आयात को घटाने का दबाव बना हुआ है। सऊदी अरब के बाद ईरान से ही भारत सर्वाधिक कच्चा तेल आयात करता है।

ईरान से सालाना लगभग 11 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात हो रहा है। यही नहीं कूटनीतिक संबंधों के तहत दोनो देशों ने पहले ही अगले चार वर्षों में आपसी व्यापार को 25 अरब डॉलर करने का लक्ष्य बना रखा है। इसमें ईरान से होने वाले आयात का आधा भुगतान भारतीय रुपये में किया जाना भी शामिल है। ईरान रुपये का उपयोग भारत से खाद्य वस्तुओं की खरीद पर करेगा।

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