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सब्सिडी देकर गेहूं निर्यात करेगी सरकार

Market Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
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खुले में रखे अनाज को खराब होने से बचाने के लिए सरकार भारी सब्सिडी देकर गेहूं निर्यात करने की संभावनाएं तलाश रही है। देश में आम आदमी को भले ही रियायती दरों पर गेहूं न उपलब्ध हो, लेकिन सरकार की इस पहल से विदेशियों को सस्ता गेहूं जरूर मिल सकेगा। यह स्थिति तब है, जब सरकारी गोदामों में जगह नहीं है और चालू खरीद सीजन का लगभग 80 फीसदी अनाज खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।
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दरअसल, भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण केंद्र सरकार की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) के जरिए 20 लाख टन गेहूं निर्यात करने की योजना है। इसके लिए पिछले दिनों एसटीसी ने खुली निविदा आमंत्रित की थी। इसमें सिर्फ छह निर्यातक एजेंसियों ने ही रुचि ली है। इन एजेंसियों ने खुली निविदा में गेहूं को सिर्फ 150 से 220 डॉलर यानी 8,400 से 12,320 रुपये टन प्रति टन की दर पर गेहूं खरीदने की पेशकश की है। यह चालू खरीद सीजन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 12,850 रुपये टन से भी कम है।

खाद्य मंत्रालय के गोदामों में रखे गेहूं का लागत मूल्य ही 18,000 रुपये टन है। ऐसे में निर्यात करने के लिए सरकार को भारी-भरकम सब्सिडी देनी पड़ सकती है। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ सी. रंगराजन पहले ही सरकार को 20 लाख टन गेहूं निर्यात के लिए 1,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का सुझाव दे चुके हैं। लेकिन डॉलर की मजबूती और निर्यातकों के मौजूदा भावों पर यदि निर्यात होता है, तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ 1,800 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

हालांकि खाद्य एवं सार्वजनिक आपूर्ति मंत्रालय का कहना है कि खाद्यान्न के रिकॉर्ड पैदावार को देखते हुए केंद्र ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर पीडीएस के लिए एक साथ छह महीने का अनाज उठाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, कल्याण योजनाओं के लिए भी केंद्र ने अतिरिक्त गेहूं देने की पेशकश की है। लेकिन राज्यों की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।

पीडीएस के जरिए एपीएल व बीपीएल कार्ड धारकों को सरकार पहले से ही रियायती दर पर गेहूं व चावल दे रही है। इसके साथ ही जो राज्य अपने यहां रियायती दर पर आटे की बिक्री करना चाहते हैं। उन्हें भी गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है।

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