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7.50 रुपए महंगा हुआ पेट्रोल, जनता में आक्रोश

Market Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
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सरकार की हरी झंडी पाकर पेट्रोल मूल्य में इजाफे का अब तक का सबसे बड़ा बम फोड़ सरकारी तेल कंपनियों ने पहले से महंगाई के मारे आम आदमी पर कहर बरपा दिया है। पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर साढे सात रुपए की वृद्धि की गई है।
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वृद्धि के इस भीषण धमाके से न केवल लोगों की जेब चिथडे़-चिथड़े होंगे बल्कि वृद्धि से पैदा होने वाली महंगाई का चौतरफा कहर आम आदमी को लहुलुहान करेगा। पेट्रोल की बढ़ी कीमतें बुधवार आधी रात से लागू हो गई हैं। पेट्रोल मूल्य इजाफे के इस धमाके के बाद कई शहरों में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमतें अस्सी रुपए लीटर से ज्यादा का अभूतपूर्व आंकड़ा पार कर गई हैं।

महंगाई के इस कहर से उबरने की उम्मीद तो दूर रसोई गैस और डीजल की कीमतों में इजाफे की तैयारी कर सरकार ने इस जले पर नमक छिड़कने की तैयारी भी कर ली है। डीजल, रसोई गैस और कैरोसीन की कीमतों की समीक्षा के लिए अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह यानी इजीओएम की बैठक भी इसी हफ्ते बुलाई जा रही है। वैसे इस पेट्रोल बम के जोरदार धमाके के खिलाफ सियासी विरोध की आवाज भी उठ गई है।

यूपीए-2 सरकार के तीन साल पूरा करने का जश्न मने चौबीस घंटे भी नहीं बीते थे कि तेल कंपनियों ने आम आदमी के लिए इस मनहूस फैसले का ऐलान कर दिया। देश हित में तत्काल कड़े आर्थिक फैसले लेने की यूपीए जलसे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के रुप में मिली हरी झंड़ी पर तुरंत अमल करते हुए तेल कंपनियों ने बिल्कुल हमलावर अंदाज में एक झटके में पेट्रोल के दाम साढे साते रुपए बढ़ाने का फरमान जारी कर दिया।

इसके लिए कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपए की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट का हवाला दिया गया। मगर हकीकत में पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। मगर डॉलर के मुकाबले रुपए की जबरदस्त हो रही पिटाई का सहारा लेकर तेल कंपनियों ने संसद का बजट सत्र खत्म होने के अगले ही दिन आम आदमी की जेब पर डाका डाल दिया।

ईंधन सब्सिडी कम करने का फैसला ले चुकी केंद्र सरकार ने दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 65.64 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 73.14 रुपए प्रति लीटर हो जाने पर चुप्पी साध रखी है। जबकि केवल यूपीए-2 सरकार के बीते तीन साल में पेट्रोल की कीमतें करीब दो गुनी हो चुकी हैं। मगर पेट्रोल की कीमतों के सरकारी नियंत्रण से मुक्त होने की लाचारी बताकर सरकार ने इस अभूतपूर्व वृद्धि से अपना पल्ला झाड़ लिया है।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने इसे सरकार की बजाय तेल कंपनियों का फैसला बता यूपीए का दामन बचाया। मगर सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि जब तेल कंपनियां ही फैसला करती हैं, तो मूल्य वृद्धि पर संसद में सियासी तूफान के डर से बजट सत्र के खत्म होने का इंतजार क्यों किया गया?

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने कहा था कि रुपए में गिरावट की वजह से तेल आयात बिल बढ़ रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की आवश्यकता है।

तेल कंपनियों ने ठहराया जायज
वहीं मूल्य वृद्धि को जायज ठहराते हुए तेल कंपनियों ने अपनी सफाई में कहा है कि पेट्रोल के दाम 6.28 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए हैं। इसमें सभी करों को जोड़ने के बाद इजाफा 7.50 रुपए प्रति लीटर बैठता है। इंडियन ऑयल ने कहा है कि पिछले छह माह में घरेलू बाजार की स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार के मूल्यों की तुलना में पेट्रोल का दाम बढ़ाना संभव नहीं हो सका था। तेल कंपनियों को फिलहाल एक लीटर पेट्रोल बिक्री पर आठ रुपए प्रति लीटर तक का घाटा हो रहा था।

तेल कंपनियों को 2011-12 में कम कीमत पर ईंधनों की बिक्री से 1,38,541 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था जो कि मौजूदा वित्त वर्ष में बढ़कर 1,93,880 करोड़ रुपए तक होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि पिछले छह माह में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत सात फीसदी तक कम हो जाने और कच्चे तेल की कीमत करीब 15 फीसदी बढ़ने के बावजूद सियासी दबाव में तेल कंपनियां कीमतों में इजाफा नहीं कर पा रही थी।

इस बारे में सरकार से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद जब हरी झंडी नहीं मिल पाई तो आखिरकार कंपनियों ने अपने पुराने घाटे को कम करने के लिए बड़ी बढ़ोतरी कर दी। तेल उद्योग के जानकारों का कहना है कि इस बढ़ोत्तरी से ऐसा लगता है कि तेल कंपनियों ने अपने दूसरे ईंधनों की बिक्री से होने वाले नुकसान की भरपाई भी पेट्रोल के दाम बढ़ाकर करना चाहती है।

--दिल्ली में प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत का अनुमानित टेबल जिसमें कर के रूप में 28 रुपये भी अधिक जाते हैं।
--40 फीसदी टैक्स और ड्यूटी वसूलती हैं केंद्र और राज्य सरकारें
--कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत 33 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठती है। अगर तेल को साफ करने यानी रिफाइनिंग कॉस्ट पर होने वाले खर्च को जोड़ दिया जाए तो एक लीटर पेट्रोल की कीमत 41.38 रुपये होती है।

एनसीआर में पेट्रोल रेट (रुपये में)
शहर--पुराना--नया
दिल्ली--65.64--73.14
नोएडा--69.81--77.31
गाजियाबाद--72.24--77.74
फरीदाबाद--66.64--74.14
गुड़गांव--66.55--74.05

विदेश में पेट्रोल की कीमत
न्यूयॉर्क--44.88
कराची--48.64
बीजिंग--48.05
ढाका--52.42
कोलंबो--61.38
नेपाल--65.26

प्रमुख शहरों में पेट्रोल की नई बढ़ी कीमतें
दिल्ली--73.14
मुंबई--78.16
कोलकाता--77.53
लखनऊ--77.32
चेन्नई--77.05 (आंकड़े रुपए प्रति लीटर में)

प्रति लीटर पेट्रोल में कितने का है पेट्रोल
डीलर के पास पेट्रोल की पहुंच कीमत-43.51
उत्पाद कर और शिक्षा सेस-16.05
डीलर कमीशन-1.50
वैट 20 फीसदी-12.12

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरीः यूपीए-2 सरकार
दिनांक--पेट्रोल--बढ़ोतरी (रूपये/प्रति लीटर)
23 मई, 2012 73.14--7.50
30 नवंबर, 2011--65.64--0.78 (घटे)
16 नवंबर, 2011--66.42--2.22 (घटे)
3 नवंबर, 2011--68.64--1.80
15 सितंबर, 2011--66.84--3.14
1 जुलाई, 2011--63.70--0.33
15 मई, 2011--63.37--5.00
16 जनवरी, 2011--58.37--2.53
14 दिसंबर, 2010--55.87--2.96
25 जून, 2010--51.43--3.50
26 फरवरी, 2010--47.43--2.72
1 जुलाई, 2009--44.63--4.00

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