रुपये को सहारा दे आरबीआई: सरकार

Market Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
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रुपये की बदहवास गिरावट को संभालने के लिए सरकार चाहती है कि रिजर्व बैंक को अब प्रभावी रूप से दखल देना चाहिए। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा है कि रुपये में स्थिरता लाने के लिए रिजर्व बैंक को फौरन जरूरी कदम उठाने होंगे। अब आरबीआई को सक्रिय रूप से मुद्रा कारोबार में हस्तक्षेप करना होगा। बुधवार को मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 55.22 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
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वाणिज्य मंत्री शर्मा ने बताया कि, मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से बातचीत की। सरकार ने यह निर्णय किया है कि रुपये में स्थिरता लाने के लिए रिजर्व बैंक को प्रभावी रूप से दखल देना चाहिए। रुपये की कमजोरी गंभीर चिंता का विषय है। इसकी वजह से आयात बिल में भारी इजाफा हुआ है और यह अन्य दूसरे कंपोनेंट को भी प्रभावित कर रहा है।
निर्यात में तेजी लाने और आयात-निर्यात में संतुलन लाने के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में शर्मा ने कहा कि देश का द्विपक्षीय कारोबार 788 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। नई व्यापार नीति निर्यात बढ़ाने में सहायक होगी। आगामी 5 जुलाई तक नई नीति तैयार हो जाएगी। कीमतों में बेलगाम बढ़ोतरी के संदर्भ में वाणिज्य मंत्री ने कहा कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था में यही स्थिति बनी हुई है। देश में मूल्य वृद्धि के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
ग्लोबल स्तर पर पेट्रोलियम कीमतों में तेजी के कारण देश का आयात बिल पहले ही बहुत अधिक हो चुकी है। रुपये की गिरावट कारण पेट्रोलियम बिल बढ़कर करीब 154 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि कूकिंग ऑयल, दालें और अन्य कामोडिटी के आयात के बोझ का दबाव भी व्यापार घाटे पर पड़ रहा है।

'दो-तीन महीने बनी रहेगी गिरावट'
रुपये में अभी दो से तीन महीने तक कमजोरी बनी रह सकती है। हमारा आयात, निर्यात के मुकाबले कहीं ज्यादा है। इससे हो रहे व्यापार घाटे को पूरा करने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा की जरूरत है, लेकिन डॉलर की मांग में तेजी के कारण इसकी ग्लोबल सप्लाई कम हो है। इसके अलावा रुपये को संभालने के लिए आरबीआई अभी तक अपने रिजर्व का ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
-डीके जोशी, चीफ इकोनॉमिस्ट, क्रिसिल
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