ई-आईपीओ को मंजूरी, म्यूचुअल में निवेश महंगा

Market Updated Thu, 16 Aug 2012 12:00 PM IST
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बाजार नियामक सेबी ने पूंजी बाजार के नियमों में व्यापक सुधार करते हुए निवेशकों को ‘ई-आईपीओ’ की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही नियामक ने आईपीओ में खुदरा निवेशकों को न्यूनतम शेयर देना भी अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, नए नियमों के मुताबिक अब निवेशकों को म्यूचुअल फंड खरीदना महंगा हो जाएगा।
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सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा ने बताया कि प्रस्तावित राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम के तहत म्यूचुअल निवेशकों को सरकार द्वारा टैक्स छूट देने का अनुरोध किया गया है। बोर्ड की बैठक के बाद सिन्हा ने बताया कि देशभर में आईपीओ और म्यूचुअल फंड का विस्तार करने के लिए व्यापक स्तर पर दूरगामी सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।
एक बड़े फैसले में सेबी ने म्यूचुअल में निवेश करना महंगा कर दिया है। इसके तहत, म्यूचुअल फंड पर लगने वाला सर्विस टैक्स का बोझ एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) की बजाय निवेशकों पर पड़ेगा। हालांकि, सर्विस टैक्स 0.02-0.03 फीसदी से अधिक नहीं होगा। इसके अलावा, छोटे शहरों में म्यूफंड वितरकों को अधिक कमीशन का लाभ पहुंचाने के लिए एएमसी को अतिरिक्त म्यूचुअल एक्सपेंस रेश्यो चार्ज करने की अनुमति दे दी गई है। छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड वितरकों को 0.3 फीसदी का कमीशन मिलेगा।
सिन्हा ने बताया कि नए नियमों के तहत आईपीओ लेकर आने वाली कंपनियों को खुदरा शेयरधारकों के लिए अब न्यूनतम निवेश 6,000 रुपये की बजाय 10 से 15 हजार रुपये कर दिया है, ताकि खुदरा निवेशक आईपीओ में बड़ी हिस्सेदारी पा सके। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि आईपीओ लाने वाली कंपनियों को इसके खुलने के पांच दिन पहले ही इसका प्राइस बैंड बताना जरूरी होगा। सेबी ने फीस लेकर निवेश की सलाह देने वालों पर नकेल कसने का मन बनाया है। आईपीओ लाने वाली कंपनियों का कम से कम मुनाफा 15 करोड़ रुपये होना चाहिए।

सेबी का कहना है कि आईपीओ के इश्यू साइज में 20 फीसदी तक का बदलाव करने के लिए दोबारा डीआरएचपी दाखिल करना जरूरी नहीं होगा। सेबी बोर्ड ने ई-आईपीओ को मंजूरी दी है। ई-आईपीओ की सुविधा 100 ब्रोकरों के टर्मिनल पर मिलेगी। सेबी अध्यक्ष ने कहा कि कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत के न्यूनतम शेयर बाजार में रखने के मानकों के लिए दो नए उपाय किए है। कंपनियां प्रवर्तकों की हिस्सेदारी घटाने के लिए बोनस शेयर और सामान्य शेयर जारी कर सकेंगी।

सेबी ने सभी सूचीबद्ध कंपनियों के लिए जून 2013 तक बाजार में न्यूनतम 25 प्रतिशत शेयर रखना अनिवार्य कर रखा है। सेबी का मानना है कि इससे कई कंपनियों के प्रवर्तक कंपनी में अपनी हिस्सेदारी आसानी से घटा पाएंगे, जो बाजार की विषम स्थितियों के कारण अभी तक ऐसा नहीं कर पा रहे थे। बाजार नियामक ने इसके साथ ही कंपनियों के लिए व्यय अनुपात और कराधान से जुड़े कई नए उपायों की भी घोषणा की है। सेबी के मुताबिक आर्थिक सुस्ती और हाल में किए गए नियामक बदलाव के कारण प्रभावित हुए वित्तीय संपदा प्रबंधन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए उसने नई व्यवस्था की है।

निवेश सलाहकारों को रेग्यूलेट करेगा सेबी
बाजार नियामक सेबी ने कहा है कि बाजार के विभिन्न इकाइयों को सलाह देने वाले निवेश सलाहकारों को वह रेग्यूलेट करेगा। इन निवेश सलाहकारों को अलग से सेबी के यहां रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इन्हें संचालित करने के लिए नियमों का निर्धारण इरडा और आरबीआई जैसे अन्य नियामकों के साथ मशविरे के बाद किया जाएगा। सेबी चेयरमैन सिन्हा ने कहा कि रिजर्व बैंक, इरडा और पीएफआरडीए के मशविरा करने के बाद उन्होंने निवेशक सलाहकारों को रेग्यूलेट करने का निर्णय किया है।
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