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1000 और 500 के नोट बंद करने से मिटेगा भ्रष्टाचार...

Market Updated Thu, 16 Aug 2012 12:00 PM IST
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भ्रष्टाचार से त्रस्त देश का आम आदमी भी मजबूत लोकपाल चाहता है। काले धन को भी वह देश की बड़ी समस्या मानता है। इस पर लगाम लगाने के लिए उसने 1000 और 500 रुपये के बड़े नोटों को बंद करने की जरूरत बताई है। वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट में आम आदमी के यह विचार सामने आए हैं।
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रिपोर्ट कहती है कि जनता चाहती है कि सरकार मजबूत लोकपाल का गठन करे, जिससे राजनीति में भ्रष्टाचार पर निगरानी रखी जा सके और भ्रष्ट राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को दंडित किया जा सके। आम लोग चाहते हैं कि भ्रष्ट लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत बिलकुल नहीं मिलनी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक लोगों की मांग है कि सरकार को एक योजना शुरू करनी चाहिए, ताकि विदेश में काला धन जमा करने वाले स्वेच्छा से उसकी जानकारी दें और उसे वापस लाने में मदद मिले। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने काले धन की समस्या से निपटने के लिए लोगों के सुझाव मांगे थे।

आम आदमी की ओर से मिले विचारों के बाद सीबीडीटी के चेयरमैन की अध्यक्षता वाले पैनल ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर मंत्रालय को भेजी है। हालांकि बड़े नोटों को वापस लेने की मांग को वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े नोटों को बंद करके काले धन पर लगाम नहीं लगाई जा सकती है क्योंकि काला धन ज्यादातर बेनामी संपत्ति, शेयर बाजार और जेवरात के रूप में जमा किया जाता है।

इसके अलावा बड़े नोट बंद करने से केवल लागत ही बढ़ेगी क्योंकि सरकार को ज्यादा नोट छापने होंगे। इसके अलावा बैंकों और आम लोगों को भी बड़ी रकम के लेन देन में समस्या आएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पहले 1946 और 1978 में बड़े नोट बंद किए गए थे, लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक लोग चाहते हैं कि काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाना चाहिए और अवैध संपत्ति जब्त की जानी चाहिए। इसके अलावा आम लोग चाहते हैं कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए उम्र कैद जैसे कड़े दंडों का प्रावधान होना चाहिए। भ्रष्टाचार के मामलों के तेजी से निपटारे के लिए विशेष अदालतें होनी चाहिए।

जनता ने और क्या कहा
बैंकिंग लेनदेन में इंटरनेट और मोबाइल तकनीक को बढ़ावा दिया जाए।
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता हो, जिसमें खास तौर से ठेके देने के प्रक्रिया, सेवाएं आवंटित करने से जैसे काम शामिल।
स्टांप ड्यूटी और कैपिटल गेन जैसे टैक्सों में कमी की जानी चाहिए।

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