कॉरपोरेट जगत पर जासूसी का साया

Corporate Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
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बढ़ती प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ अब कॉरपोरेट जगत में जासूसी के नेटवर्क को तेजी से फैला रहा है। देश में विभिन्न क्षेत्रों की 35 फीसदी कंपनियां प्रतिस्पर्धियों से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कॉरपोरेट जासूसी में मशगूल हैं। यह जासूसी विशेष रूप से सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों के जरिये कंपनी और उनके कर्मचारियों पर की जा रही है। उद्योग संगठन एसोचैम ने एक सर्वे में इसका खुलासा किया है।
संगठन के जरिए जनवरी से मई 2012 के बीच कराए गए सर्वे में शामिल एक हजार से ज्यादा कंपनियों के आला अधिकारियों ने यह बताया है कि फेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूब, गुगल प्लस जैसे नेटवर्किंग साइटों के जरिये प्रासंगिक जानकारी और दूसरे कंपनियों व उनके कर्मचारियों को ट्रैक पर रखा जाता है। इसके अलावा कॉरपोरेट जासूसी के लिए चपरासी और फोटोकॉपी करने वाले जैसे मामूली लोगों का सहारा भी लिया जाता है।

सर्वेक्षण में कई कंपनियों ने यह भी बताया कि वे अपने यहां कंप्यूटर एक्सपर्ट की नियुक्ति विशेष रूप से करते हैं, ताकि कंप्यूटर में मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर को डाला जा सके। दूसरी कंपनी के नेटवर्क को हैक करने, ई-मेल ट्रैक करने और कंपनियों की अन्य गतिविधियों पर भी नजर रखने के लिए हैकिंग एक्सपर्ट की भी सेवाएं ली जा रही हैं।

सर्वे में शामिल 350 जासूसी फर्मों ने यह बताया कि आईटी-बीपीओ कंपनियों, बुनियादी क्षेत्र (इन्फ्रा सेक्टर), एफएमसीजी, बैंक, बीमा, विनिर्माण और टेलीकॉम क्षेत्र में उनकी मांग सर्वाधिक है। एसोचैम के महासिचव डीएस रावत ने बताया कि इन डोमेन में काम करने वाले लगभग सभी कंपनियों के प्रतिनिधि औद्योगिक जासूसों के जरिये दूसरी कंपनियों की सूचनाएं, व्यापार से जुड़ी खुफिया जानकारी पाने के लिए गुप्तचरों और जासूसी एजेंसियों से डील करते हैं।

सर्वे में शामिल कंपनियों के ज्यादातर अधिकारियों ने बताया कि वे कर्मचारियों की जीवनशैली और उनके ठिकानों पर नजर रखने के लिए जासूसी एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं। इसके अलावा कंपनी की रोजगार स्क्रीनिंग पॉलिसी के तहत प्रत्येक व्यक्ति की पृष्ठभूमि जानने के लिए उसके व्यवसायिक, आपराधिक और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल भी की जाती है।

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