घट सकता है स्टील कंपनियों का मुनाफा

Corporate Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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इस्पात उत्पादन की लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी और मांग में कमी के कारण 2012 की दूसरी छमाही में देश की स्टील कंपनियों उत्पादकों के लाभ में गिरावट आने के आसार हैं। साख निर्धारण एजेंसी फिच के अनुसार मानसून आने और निर्माण प्रक्रिया में कमी के कारण जुलाई से सितंबर 2012 तक इस्पात की कीमतों में गिरावट का दौर रहने का अनुमान है। इसके बावजूद उसने इस्पात उत्पादकों के लिए लघु अवधि की मांग के लिए अपने अनुमान को स्थिर रखा है। उसने कारोबारियों को अक्टूबर में त्योहारी सीजन के दौरान ही इस्पात की कीमतों में इजाफा करने का भी सुझाव दिया है।
फिच ने कहा कि देश में सरकार वैसे तो इस्पात उद्योग को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित नहीं करती है, लेकिन इसके बावजूद अप्रत्यक्ष कर लगाकर इसे नियंत्रित कर सकती है। दूसरी ओर रुपये में लगातार आ रही गिरावट के कारण आयातित कोकिंग कोयले की कीमतों में वृद्धि से भी इस्पात कारोबारियों के लाभ में गिरावट आने की आशंका है। एजेंसी ने लौह अयस्क खनन करने वाली एनएमडीसी द्वारा मई 2012 में कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण इस्पात उत्पादन की लागत बढ़ने की भी संभावना व्यक्त की।

हालांकि फिच ने कहा कि भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड और टाटा स्टील लिमिटेड जैसे एकीकृत इस्पात उत्पादकों के पास खुद के लौह अयस्क खनन की सुविधा होने से उनकी उत्पादन लागत में बदलाव आने की उम्मीद नहीं है, लेकिन रेलवे के लौह अयस्क की माल ढुलाई में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने से इसकी कीमतों के प्रभावित होने की संभावना है।

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