अब दवाओं पर गिरेगी महंगाई की गाज

Corporate Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
Now-inflation-will-fall-victim-to-drugs

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर Free में
कहीं भी, कभी भी।

70 वर्षों से करोड़ों पाठकों की पसंद

ख़बर सुनें
महंगाई से जूझ रहे आम आदमी पर जल्द ही महंगी दवाओं की गाज भी गिर सकती है। उत्पादन लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए दवा नियामक ने दवा के दामों की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। इसके तहत, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) अति जरूरतमंद दवाओं की कीमतों की समीक्षा कर रहा है। समीक्षा में वेतन, मजदूरी और पैकेजिंग की लागत में हुई बढ़ोतरी को शामिल किया गया है। एनपीपीए अपनी रिपोर्ट जल्द ही दवा नियामक को सौंपेगा। इसके बाद दवा की नई कीमतें तय की जाएंगी।
विज्ञापन

काफी समय से हो रही है कीमत बढ़ाने की मांग
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की ऊंची कीमतों का असर आयात पर पड़ा है। न सिर्फ दवाओं में प्रयोग होने वाले कच्चे माल बल्कि उनके उत्पादन में भी खासी बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके चलते दवा निर्माता कंपनियां लंबे समय से कीमतें बढ़ाए जाने की मांग कर रही हैं। इसे देखते हुए दवा नियामक ने अति जरूरी दवाओं के दामों की समीक्षा कराने का फैसला किया है। इन दवाओं में ज्यादातर गंभीर रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हैं।
कनवर्जन और पैकेजिंग लागत को बनाया आधार
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दवा नियामक ने दवाओं के दामों की समीक्षा की जिम्मेदारी एनपीपीए को सौंपी है। दवाओं की लागत की जांच करेगा। इसके लिए एनपीपीए दवा निर्माण में आने वाली लागत के आंकड़ों को एकत्र करने का काम शुरू कर दिया है।

दवाओं की बढ़ी हुई लागत का पता लगाने के लिए कनवर्जन कास्ट और पैकेजिंग लागत को आधार बनाया गया है। कनवर्जन कास्ट में वेतन, मजदूरी, शोध व अनुसंधान में होने वाले खर्च के अलावा प्रशासनिक खर्च शामिल है, जबकि पैकेजिंग में पैकिंग में उपयोग होने वाली सभी चीजों के दामों को खंगाला जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us