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आरबीआई आज कर सकता है ब्याज दरों में कटौती

Banking-Insurance Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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विकास दर में गिरावट और अर्थव्यवस्था पर छाए काले बादलों के मद्देनजर रिजर्व बैंक सोमवार को प्रमुख ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। सरकार, अर्थशास्त्री और उद्योग जगत की ओर से भी लगातार मांग की जा रही है कि रिजर्व बैंक को महंगाई को थामने के बजाय विकास की रफ्तार बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
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रिजर्व बैंक सोमवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा। इसमें उम्मीद जताई जा रही है कि रेपो दरों में कम से कम 0.25 फीसदी की कमी की जा सकती है, जबकि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में एक फीसदी तक की कटौती की जा सकती है। उद्योग जगत ने भी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जताई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने विकास दर में गिरावट पर चिंता जताते हुए ब्याज दर में कटौती की वकालत की है, जबकि एसोचैम ने उद्योगों की खस्ताहाल स्थिति का हवाला देते हुए प्रमुख ब्याज दरों में एक फीसदी तक की कटौती की सिफारिश की है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए रिजर्व बैंक को अपनी नीतियों के जरिए न्यायसंगत कदम उठाने चाहिए।
एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए रिजर्व बैंक को रेपो दर और सीआरआर में एक फीसदी तक की कटौती करनी चाहिए। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि रिजर्व बैंक को प्रमुख ब्याज दर घटाकर औद्योगिक विकास बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। इन संगठनों का कहना है कि देश में अभी भी मुद्रास्फीति का दबाव बना हुआ है।

ऐसा पिछले कुछ महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने की वजह से भी हो रहा है। यही वजह है कि भारत वैश्विक कमोडिटी की कीमत घटने के बावजूद इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है। ऐसे समय में आरबीआई को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए रुपये के अवमूल्यन को रोकने पर ध्यान देना चाहिए।

अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए और बाजार को एक मजबूत संकेत देते हुए रिजर्व बैंक को रेपो दरों और सीआरआर में एक फीसदी तक की कटौती करनी चाहिए।
राजकुमार धूत, एसोचैम के अध्यक्ष
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