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आजादी के बाद से अब तक छत्तीसगढ़ की खरसिया जीत नहीं सकी भाजपा

नमित शुक्ला, अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 26 Aug 2018 09:37 AM IST
OP Chaudhary
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छत्तीसगढ़ का खरसिया भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है।
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खरसिया सीट आज भी कांग्रेस के पास है। वर्तमान में यहां कांग्रेस के उमेश पटेल विधायक हैं। आगामी चुनाव में भी उनका टिकट तय माना जा रहा है। इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नंद कुमार पटेल हमेशा अजेय रहे। वे पांच बार विधायक रहे थे। उनसे पहले कांग्रेस के ही लक्ष्मी प्रसाद पटेल के पास यह सीट रही। वे भी 1977 से 1988 तक विधायक रहे। इस बार इस सीट पर भाजपा आईएएस अधिकारी और रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी के सहारे कांग्रेस की इस अजेय सीट पर अपनी मुहर लगाना चाहती है।

खरसिया विधानसभा सीट 1977 बनी। पहला चुनाव हुआ, तो कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल विधायक बने। वे 1988 तक लगातार विधायक रहे। उन्होंने अर्जुन सिंह के लिए अपनी सीट से इस्तीफा दिया। यहां उपचुनाव हुआ और कांग्रेस से अर्जुन सिंह के खिलाफ भाजपा के दिलीप सिंह जूदेव उतरे। इसमें अर्जुन सिंह ने जीत हासिल की और कांग्रेस का वर्चस्व खरसिया में कायम रहा। इसके बाद कांग्रेस से नंदकुमार पटेल 1990, 1993, 1998, 2003 और 2008 तक लगातार पांच बार जीत हासिल करके विधायक सीट कब्जे में रखी। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई।
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