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भोपाल: तीन हजार से भी कम क्षमता वाले सेंट्रल जेल में हैं चार हजार कैदी, कोरोना फैला तो मच जाएगा कोहराम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: प्रियंका तिवारी Updated Tue, 06 Apr 2021 02:40 PM IST
सार

देश में कोरोना ने फिर से कोहराम मचा दिया है। मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में वायरस का संक्रमण बेकाबू हो चुका है। मध्यप्रदेश में सोमवार को सभी जिलों में मिलाकर 3 हजार 722 मरीज मिले हैं। 18 मरीजों की मौत भी हुई है। 1 महीने पहले जहां  रोजाना की संक्रमण दर 3 फीसद थी वह अब बढ़कर 11 फीसद पर पहुंच गई है यानी 100 सैंपल की जांच की जा रही है तो उनमें 11 लोग कोविड-19 से संक्रमित मिल रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यहां के सेंट्रल जेल में भी कोरोना फैलने का खतरा बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, यहां क्षमता से डेढ़ गुना ज्यादा कैदी रख गए हैं। ऐसे में अगर जेल में कोरोना संक्रमण फैल गया तो हालात बेकाबू हो जाने का खतरा है। एक अधिकारी के मुताबिक सेंट्रल जेल की क्षमता लगभग दो हजार सात सौ कैदियों को रखने की है, लेकिन यहां चार हजार बंदी हैं। इनमें से दो हजार कैदी विचाराधीन हैं, जिनके कारण जेल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है।



दरअसल, जेल प्रबंधन का मानना है कि इन विचाराधीन कैदियों का केस के सिलसिले में बाहर से आना जाना लगा रहता है। साथ ही इन बंदियों से मिलने के लिए लोगों का जेल परिसर में आना जाना लगा रहता है। ऐसे में जेल में भी कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।


जेल प्रबंधन का कहना है कि आठ बैरक में नए कैदियों को सात दिनों के लिए क्वारंटाइन करने की व्यवस्था की गई है। उनकी मुलाकात पर भी एक हफ्ते तक रोक है। जेल में कोरोना से बचने वाले सभी नियमों का भी पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।

जेल प्रबंधन ने मीडिया से विचाराधीन कैदियों को दिन में एक बार काढ़ा और दो बार गर्म पानी दिया जाता है। इसके साथ ही इन सबकी लगातार स्क्रीनिंग होती है। सभी को मास्क दिए गए हैं। कोई भी मास्क  पहने बिना जेल में प्रवेश नहीं कर सकता। इसके अलावा जेल में शारीरिक दूरी का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। जेल में लोग आपस में एक दूसरे से कम मिलें, इसके लिए उनके मूवमेंट को कम किया गया है। 

जेल प्रबंधन ने बताया कि कैदियों और स्टाफ को पैरामेडिकल का कोर्स भी कराया गया है। फिलहाल पैरामेडिकल कोर्स के 40 कैदी जेल में हैं, जिनके ऊपर अन्य कैदियों की स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी है।

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