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राजधानी में दाह संस्कार के लिए 12 घंटे से ज्यादा करना पड़ रहा इंतजार

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Apr 2021 02:13 AM IST
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लखनऊ। राजधानी में कोरोना से मौत के बाद 12 घंटे बाद भी शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज प्रयागराज से रिटायर्ड डॉ. मिलिंद मुखर्जी के अंतिम संस्कार के लिए परिवारीजन सुबह से देर रात तक बैंकुंठ धाम भैंसाकुंड के विद्युत शवदाह गृह के बाहर एंबुलेंस में शव के साथ इंतजार करते रहे। इसी तरह कई अन्य परिवार भी बैठे रहे। शवदाह गृह के बाहर एंबुलेंसों की कतार लगी रही। बुधवार रात 11 बजे तक 27 शवों का अंतिम संस्कार कोविड नियमों का पालन करते हुए हो चुका था।
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बैंकुंठ धाम, भैंसाकुंड पर सुबह 10.30 बजे से दाह संस्कार के लिए बारी का इंतजार कर रहे डीके सिंह ने गुस्सा और दर्द बयां किया। उनका कहना है कि डॉ. मिलिंद मुखर्जी के दाह संस्कार में सम्मिलित होने के लिए वे यहां बैठे हैं। डॉ. मिलिंद उनके एक जूनियर साथी के पिता हैं। वहीं, दूसरे शव लेकर आए लोगों से पता चला कि 16 अंतिम संस्कार के बाद भी करीब 10 और शव अंतिम संस्कार के लिए इंतजार में थे। विद्युत शवदाह गृह के कर्मचारियों ने बताया कि इनका अंतिम संस्कार सुबह पांच बजे तक हो पाएगा।

अव्यवस्था बढ़ा रही दु:ख
डीके सिंह ने बताया कि यहां दाह संस्कार करने वाले स्टाफ के पास पीपीई किट भी नहीं थी। हम चार-पांच किट रखी थी, जिसे इन कर्मचारियों को दिया। बैकुंठ धाम में एक ही मशीन चल रही है। दूसरी बंद है। पंखे बंद हैं। रात के समय महज एक लाइट जल रही है।
सात घंटे अंतिम संस्कार में लगे
सामाजिक कार्यकर्ता सुमन सिंह रावत ने बताया कि मंगलवार को एक परिचित का निधन हुआ। उनका शव वहां पौने 11 बजे तक पहुंच गया, लेकिन दाह संस्कार पौने छह बजे के करीब हुआ। जिम्मेदारों से अनुरोध है कि यहां की व्यवस्था सुधारी जाए।
मशीनों की संख्या बढ़ाई जाए
समाज सेवी आलोक सिंह ने प्रशासन को ट्वीट कर हालात से अवगत भी कराया है। उन्होंने बैकुंठ धाम की दिक्कतों को उठाते हुए लिखा है कि नगर निगम के पास बजट है, फिर भी मशीन नहीं लगवाई जा रही है।
दूसरे जिलों से भी आ रहे संक्रमित शव
शहर के आसपास कई जिलों में विद्युत शवदाह गृह नहीं हैं। ऐसे में वहां के कोरोना संक्रमितों के शव राजधानी पहुंच रहे हैं। गुलाला घाट पर विद्युत शवदाह गृह की जिम्मेदारी देखने वाले कर्मचारी गुड्डू वाजपेयी ने बताया कि आसपास के जिलों के भी शव आते रहने से कतार लग जाती है। बुधवार को रात 10 बजे तक 11 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। बैकुंठ धाम पर बुधवार देर रात तक 16 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। एक शव के अंतिम संस्कार में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है।
सिफारिश से परेशान कर्मचारी अफसर, देने पड़े टोकन
शव का अंतिम संस्कार जल्द से जल्द कराने के लिए नगर निगम कर्मचारियों से लेकर अफसरों तक पहुंच वाले दबाव डालते हैं। इस परेशानी से निजात पाने केे लिए विद्युत शवदाह गृह पर अब अंतिम संस्कार के लिए टोकन दे रहा है।
नया शवदाह गृह बनाने की तैयारी
नगर निगम के मुख्य अभिंयता विद्युत यांत्रिक, रामनगीना त्रिपाठी ने बताया कि अभी भैंसाकुंड और गुलाला घाट पर विद्युत शवदाह गृह हैं। अब एक और विद्युत शवदाह गृह आलमबाग में बनाने की तैयारी है। उसके लिए शासन से बजट जारी हो रहा है। बजट आते ही वहां पर काम शुरू करा दिया जाएगा। नगर विकास मंत्री ने उसके लिए घोषणा की है। इससे काफी हद तक मदद मिलेगी।
दूसरे जिलों से भी आ रहे शव
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि विद्युत शवदाह गृह पर जो शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। उनमें कई बाहर से आए मरीजों के भी हैं। यहां लखनऊ में बाहरी जिलों के साथ दूसरे प्रदेशों से भी मरीज इलाज के लिए लखनऊ आते हैं। उनकी मौत के बाद कोविड प्रोटोकॉल को देखते हुए परिवारीजन यहीं अंतिम संस्कार करते हैं। इससे इनकी संख्या ज्यादा बनी हुई है।

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