उप्र बोर्ड परीक्षा में आठ लाख बच्चे हिंदी में फेल, दुखद... भयावह... शिक्षक बोले- बड़े बदलाव की जरूरत

अभिषेक सहज, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 15 Jul 2020 04:27 PM IST
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परीक्षा - फोटो : पेक्सेल्स

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यूपी बोर्ड की परीक्षा में आठ लाख बच्चे हिंदी में फेल हो गए। दुखद...। भयावह...। हिंदी भाषी प्रदेश में हिंदी का यह हाल? क्यों...? कैसे...? कौन जिम्मेदार है...? ये सवाल नए नहीं। पहले भी उठते रहे हैं। आज भी उठ रहे हैं। पर, कुछ ज्यादा तीखे...। तीखे होने भी चाहिए। क्योंकि सवाल एक विषय में फेल हो जाने भर का नहीं है।
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क्या हिंदी महज हमारे लिए एक भाषा भर है? कतई नहीं। यह हमारी संस्कृति की संवाहक है। हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है। अब खुद से सवाल कीजिए। हम अपनी जड़ों से कैसे कट रहे हैं? क्यों कट रहे हैं? ....क्योंकि हम अपनी चीजों पर गर्व करना भूल गए। कमतरी का यह एहसास मिटाना होगा... अपनी भाषा अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा... हालात खुद-ब-खुद बदल जाएंगे। 
यूपी बोर्ड की परीक्षा में इस वर्ष आठ लाख परीक्षार्थी हिंदी विषय में फेल हो गए। हिंदी भाषी प्रदेश में ही नई पीढ़ी में हिंदी को लेकर इस तरह का लचर प्रदर्शन हमें हिंदी के भविष्य को लेकर चिंतित होने पर मजबूर करता है। हिंदी की इस दुर्दशा के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
क्या अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की बाढ़ इसके लिए जिम्मेदार हैं? या फिर  समाज में उस धारणा के गहरे पैठ कर जाना जो अंग्रेजी को एक स्टेटस सिंबल मानती है। या फिर यह धारणा कि अंग्रेजी रोजगार की भाषा है? यूपी बोर्ड के नतीजेे से एक बात तो बिल्कुल साफ है कि हिंदी महज परीक्षा पास करने का विषय बनकर रह गई है।
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