फर्जी रजिस्ट्री मामले में नपेंगे सब रजिस्ट्रार भी

ज्ञान सक्सेना/लखनऊ Updated Wed, 23 Oct 2013 02:16 AM IST
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notice issue to sub ragistrar

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फर्जी दस्तावेज व झूठे गवाह के सहारे हुई भू-संपत्तियों की रजिस्ट्री प्रकरण में निबंधन प्रशासन ने अब सब रजिस्ट्रारों को भी जांच के दायरे में ले लिया है।
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विभागीय स्तर से शुरू हुई गुपचुप जांच पड़ताल में जिन इलाकों में फर्जी रजिस्ट्री के मामले पाए गए हैं,वहां की जिम्मेदारी संभालने वाले सब रजिस्ट्रारों के क्रियाकलाप की जांच कराई जा रही है।
यह जांच सहायक आयुक्त निबंधन के स्तर से हो रही है। इस जांच के आधार पर जल्द ही रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराने में शिथिलता व लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित सब रजिस्ट्रारों को नोटिस जारी किए जाने की भी तैयारी है।
दूसरी तरफ फर्जी रजिस्ट्री के खुलासे के बाद निबंधन कार्यालय व तहसील प्रशासन भी आमने सामने आ गए हैं।

निबंधन कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों ने फर्जीवाड़े के लिए तहसील स्तर से खरीदी जाने वाली भू-संपत्ति के बैनामा के दाखिल खारिज में हुई लापरवाही को कारण बताते हुए अपना बचाव शुरू कर दिया है।

इससे इतर एसडीएम सदर ने इस मामले में तहसील स्तर से चूक की बात को सिरे से खारिज किया। उनका कहना था कि किसी भी भू-संपत्ति का निबंधन कराने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के सब रजिस्ट्रार व स्टाफ की होती है।

खरीददार द्वारा निबंधन के समय प्रस्तुत किए जाने वाले भू-संपत्ति से जुड़े राजस्व अभिलेख,अन्य दस्तावेज व सेल डीड इत्यादि  की जांच पड़ताल सब रजिस्ट्रार के स्तर पर होती है।

ऐसे में अगर तहसील स्तर से जोड़-तोड़ के आधार पर फर्जी बैनामा के सहारे दाखिल खारिज करा भी लिया जाए तो सब रजिस्ट्रार के पास निबंधन प्रक्रिया पूरी करने से पहले इसे चुनौती देते हुए सिविल कोर्ट में वाद दाखिल कराने का वैधानिक अधिकार भी है।

शिकायत के आधार पर जालसाजी से भू संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने की करीब छह शिकायतें निबंधन प्रशासन के पास आईं थीं।

इस संबंध में सहायक महानिरीक्षक निबंधन ओपी सिंह के स्तर से चल रही जांच पड़ताल में मोहनलालगंज व गोमती नगर इलाके की दो भू-संपत्तियों में क्रेताओं द्वारा फर्जी विक्रेता व उसके जाली हस्ताक्षर दिखा झूठे गवाह के सहारे रजिस्ट्री कराने के मामले की पुष्टि हुई।

इसके बाद क्रेता के खिलाफ जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराने व कराए गए निबंधन को शून्य घोषित किए जाने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। वहीं खरगापुर,काकोरी,बालकगंज व गोमती नगर एक्सटेंशन के अन्य चार मामलों में जांच प्रक्रिया लंबित है।

अवश्य परखें भू-संपत्ति का टाइटल
भू-संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में लगातार बढ़ते फर्जीवाड़े से बचने के लिए खरीददार को ही सावधानी बरतनी पड़ेगी। सहायक महाप्रबंधक निबंधन ओपी सिंह बताते हैं कि महज विज्ञापन के आधार पर हाईटेक टाउनशिप में जमीन पाने का प्रयास न करें।

धंधेबाजों के चंगुल से बचने के लिए क्रेता को खुद ही जागरूक होना पड़ेगा। इसके लिए किसी भी जमीन अथवा मकान को खरीदने से पहले उस संपत्ति के टाइटल को अवश्य सत्यापित कर उसकी सेल डीड को परखे।

निबंधन कार्यालय से आसानी से प्राप्त होने वाले इंडेक्स प्रिंट आऊट के आधार पर विक्रेता द्वारा बेची जाने वाली जमीन अथवा मकान के भारमुक्त होने अथवा न होने का पता भी आसानी से लगाया जा सकता है।

किसी भी प्रस्तावित टाउनशिप में जमीन इत्यादि खरीदने से पहले उसका बिल्डर से उसका वैधानिक स्तर पर स्वीकृत लेआउट अवश्य देखें। किसी भी भू-संपत्ति का टाइटिल डिफेक्टिव होने पर उसे खरीदने में पैसा बिल्कुल न लगाएं।
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