लगातार दूसरे साल राज्यपाल का अभिभाषण तैयार करने में लापरवाही, बड़ी गलती से सरकार की किरकिरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 09 Feb 2018 02:15 AM IST
 विधानभवन में अभिभाषण पढ़ते राज्यपाल रामनाईक।
विधानभवन में अभिभाषण पढ़ते राज्यपाल रामनाईक। - फोटो : amar ujala
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लगातार दूसरा साल है जब शासन के अधिकारियों ने राज्यपाल राम नाईक के अभिभाषण में सरकार की किरकिरी करा दी। 2017 में विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में फसल ऋणमाफी को लेकर त्रुटिपूर्ण तथ्य दे दिए थे। बृहस्पतिवार के अभिभाषण में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से जुड़े आयोजन के त्रुटिपूर्ण तथ्य पढ़वा दिए।
दरअसल, राज्यपाल राम नाईक की सलाह पर योगी सरकार ने पिछले साल 30 दिसंबर को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के अमर उद्घोष ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ के 101 वर्ष पूरे होने पर स्मृति समारोह का आयोजन किया था। राज्यपाल नाईक की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।

वर्ष 2018 के पहले विधानमंडल सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के पेज दो के अंतिम पैरा व पेज तीन के पहले पैरा में सरकार की इस पहल का उल्लेख है। इसमें कहा गया है,‘देश को आजादी दिलाने के लिए अनन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान किया। स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता स्वानामधन्य श्री बाल गंगाधर तिलक, जिन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उद्घोष किया था कि‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।’ उनके इस उद्घोष से क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार हुआ था और अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए विवश होना पड़ा था।’

अभिभाषण में यहां तक के तथ्यों से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इसके बाद कहा गया है, ‘मेरी सरकार ने इस वर्ष श्री बाल गंगाधर तिलक के 101वें जन्मदिन के अवसर पर समारोह का आयोजन कर न केवल उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी है अपितु ऐसे तमाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद कर उनकी स्मृति को अक्षुण्ण रखने का काम किया है।’ अभिभाषण का यह अंश सही नहीं है। दरअसल, यह समारोह तिलक के 101वें जन्मदिन पर न होकर उनके अमर उद्घोष के 101 वर्ष पूर्ण होने पर हुआ था।
 
यह लिपिकीय त्रुटि तो नहीं!
पिछली बार सरकार ने ऋणमाफी की कट ऑफ डेट की गलती को लिपिकीय त्रुटि कहकर बचाव किया था, मगर इस बार गलती किसी अंक की न होकर पूरे वाक्य की है। इससे अभिभाषण की तैयारी से जुड़ी लापरवाही नजर आ रही है। पिछली बार विपक्ष ने कर्जमाफी की कट ऑफ डेट में गलती को मुद्दा बनाया था और सरकार को उसमें सुधार करना पड़ा था। इस बार फिर विपक्ष को अफसरों की लापरवाही का मुद्दा मिल गया है।

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