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लेवाना सुइट्स अग्निकांड : एलडीए व अग्निशमन विभाग के जवाब से हाईकोर्ट नाराज, ठोस कार्रवाई करने की चेतावनी

माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 22 Sep 2022 09:14 PM IST
सार

कोर्ट ने एलडीए व अग्निशमन विभाग को आदेश दिया कि राजधानी के ग्रुप हाउसिंग, अस्पतालों व व्यावसायिक जगहों में सुरक्षा इंतजामों खास तौर पर अग्निशमन की व्यवस्था का सर्वे करें। छह हफ्ते में इसकी कारवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।

होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड
होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लखनऊ के लेवाना सुइट्स होटल में हुए अग्निकांड मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और अग्निशमन विभाग को आड़े हाथों लिया। दोनों की कार्रवाई व जवाब से असंतुष्ट कोर्ट ने खुली अदालत में ताकीद किया कि जिम्मेदारों की नाकामी के चलते लेवाना सुइट्स जैसी घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें लोगों की जान चली जाती है। हम जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की खंडपीठ ने लेवाना मामले में दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एलडीए व अग्निशमन विभाग पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने दोनों को आदेश दिया कि राजधानी के ग्रुप हाउसिंग, अस्पतालों व व्यावसायिक जगहों में सुरक्षा इंतजामों खास तौर पर अग्निशमन की व्यवस्था का सर्वे करें। छह हफ्ते में इसकी कारवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। जहां अनियमितता मिली है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने लेवाना मामले में अपर मुख्य सचिव, आवास व शहरी नियोजन, नगर आयुक्त लखनऊ व आवास आयुक्त आवास विकास परिषद आदि को भी पक्षकार बनाने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान एलडीए वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे। कोर्ट केआदेश के तहत एलडीए वीसी ने भवनों, अस्पतालों, व्यावसायिक जगहों में अग्निशमन सुरक्षा इंतजामों का जबकि सरकारी वकील ने चीफ फायर अफसर का जवाबी हलफनामा भी पेश किया।


5-6 साल में कोई कार्रवाई की हो तो बताएं... जवाब नहीं दे सके चीफ फायर अफसर
लेवाना मामले में चीफ फायर अफसर के जवाब से कोर्ट बेहद नाराज हुआ। पूछा- बीते 5-6 साल में कोई एक उदाहरण बताएं जिसमें अग्निशमन विभाग ने कारवाई की हो। इस पर वे कोई जवाब नहीं दे सके। कोर्ट ने कहा कि ऐसी नाकामी ही लेवाना जैसी घटनाओं का कारण बनती हैं।

पीड़ितों को क्यों न सरकार से मुआवजा दिलाया जाए
इस सिलसिले में कोर्ट ने पूछा कि क्यों ने ऐसे अग्निकांडों के पीड़ितों व उनके परिवारों को सरकार से मुआवजा दिलाया जाए? इस दौरान पारिजात अपार्टमेंट में आग का मुद्दा भी उठा। वरिष्ठ अधिवक्ता असित कुमार चतुर्वेदी ने हस्तक्षेप अर्जी दाखिल कर कहा कि एलडीए ने अपने ही इस अपार्टमेंट की फायर एनओसी लिए बगैर पूर्णता प्रमाणपत्र जारी कर दिया। कोर्ट ने इस पर भी सख्त रुख अपनाया और  इस आदेश के साथ मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को नियत की है।

हमें करना पड़ रहा सरकार का काम : हाईकोर्ट
‘एलडीए व आवास विकास जैसे प्राधिकरण की जवाबदेही तय करने का काम सरकार द्वारा किया जाता हैै, जबकि यहां सरकार का काम हमें करना पड़ रहा है। हम जानना चाहते हैं कि जो भवन नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाए गए हैं, उन पर इतने दिनों के बीच मे आखिर क्या कार्रवाई हुई?’
- लखनऊ पीठ

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