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शिक्षकों की भर्ती में निजी कॉलेजों की मनमानी पर उच्च शिक्षा विभाग ने खड़े किए हाथ

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 10 Oct 2017 01:10 AM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ विश्वविद्यालय - फोटो : डेमो
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वित्तविहीन डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के अनुमोदन में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में नाकामयाब रहने पर उच्च शिक्षा विभाग ने शासन को हस्तक्षेप करने को कहा है।
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उच्च शिक्षा निदेशक की तरफ से संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. प्रीति गौतम ने शासन को लिखे पत्र में इस मामले को उनके स्तर का बताया है। कहा, शासन ही इस मामले में कार्यवाही करे।


बता दें, उच्च शिक्षा उत्थान समिति ने जनसुनवाई पोर्टल पर निजी डिग्री कॉलेजों द्वारा शिक्षकों के शोषण का मुद्दा उठाया था।

इसमें बताया गया था कि वित्तविहीन डिग्री कॉलेज प्रशासन विवि से अर्ह शिक्षकों का अनुमोदन कराते हैं। बाद में उन्हें बाहर करके कम वेतन पर अनर्ह शिक्षकों से पढ़ाई कराते हैं।

भौतिक सत्यापन न होने की वजह से यह कभी पता ही नहीं चल पाता कि कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षक असल में विवि से अनुमोदित हैं या नहीं। इस मामले में शासन ने उच्च शिक्षा विभाग को निजी कॉलेज के शिक्षकों के सत्यापन, आधार से लिंक करने व उनकी सेवा नियमावली बनाने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग की सहायक निदेशक डॉ. विनीता यादव ने शिक्षकों व प्राचार्य के भौतिक सत्यापन का आदेश जारी किया था। यह कार्य 15 जुलाई तक पूरा किया जाना था, लेकिन अंतिम तिथि बीतने के बाद भी शिक्षकों के भौतिक सत्यापन का खाका तक नहीं खींचा गया।

इसके बाद भी कई पत्र जारी हुए, लेकिन न तो शिक्षकों का भौतिक सत्यापन हुआ और ना ही शिक्षकों की सेवा नियमावली बनाने की शुरुआत ही हुई। अब आखिर में मामला शासन के ऊपर डाल दिया गया है।
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लखनऊ विवि ने भी नहीं की सत्यापन की शुरुआत

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