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नदी में डूबने से बचाए गए बच्चे ने बताई चार के मौत की कहानी, गांव में मचा कोहराम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 23 Jul 2018 10:27 AM IST
इनसेट में मृतक बच्चे व गांव में मचा कोहराम
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सुल्तानपुर जिले के करौंदीकलां क्षेत्र में सहाबुद्दीनपुर गांव के पास गोमती नदी में रविवार सुबह मछली पकड़ने उतरे नौ बच्चे पानी में डूब गए। नदी में मौजूद मछुआरों ने पांच बच्चों को बचा लिया लेकिन चार बच्चों की डूबकर मौत हो गई। एक साथ चार बच्चों की मौत की सूचना पर सीओ कादीपुर व तहसीलदार घटनास्थल पहुंचे और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया।



क्षेत्र के रमसापुर गांव निवासी मनीष (11) पुत्र हरिलाल पासवान, शिवम (8), सत्यम (11) पुत्र त्रिभुवन पासवान, सूरज (11), लक्की (8) पुत्र अशोक पासवान, मनीष (8) पुत्र बरसाती, प्रिंस (14) पुत्र सीताराम निवासी रमसापुर, मोहम्मद हमीद (12) पुत्र स्व. इदरीश व करीम (10) पुत्र सादिक अली निवासी बौढ़िया बालमऊ रविवार सुबह एक साथ मछली पकड़ने के लिए निकले थे।


ये बच्चे पड़ोस के सहाबुद्दीनपुर गांव के किनारे से गुजरी गोमती नदी में उतर गए। देखते ही देखते सभी बच्चे पानी में डूबने लगे। बच्चों के शोर मचाने पर कुछ दूर मौजूद मछुआरों की नजर पड़ गई। उन्होंने गोमती नदी में छलांग लगा दी। मछुआरों ने पानी में डूब रहे सूरज, लक्की, सत्यम, मनीष पुत्र बरसाती और करीम को बचा लिया। प्रिंस, मनीष पुत्र हरिलाल, मोहम्मद हमीद व शिवम को नहीं बचा सके।

करीब दो घंटे बाद निकाला गया बच्चे का शव

विलाप करते बच्चों के परिवारीजन।
विलाप करते बच्चों के परिवारीजन। - फोटो : amar ujala
इस बीच नदी से बाहर निकाले गए सत्यम ने एक मछुआरे के मोबाइल फोन से घर वालों को सूचित किया। बच्चों के डूबने की सूचना पाते ही रमसापुर और बौढ़िया बालमऊ गांव में कोहराम मच गया। तमाम ग्रामीण नदी के किनारे पहुंच गए। इस बीच मनीष, शिवम, मोहम्मद हमीद का शव मछुआरे पानी से निकाल चुके थे, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल रहा था। करीब दो घंटे बाद मछुआरों ने प्रिंस का शव भी बाहर निकाल लिया।

नदी में बच्चों के डूबने की सूचना मिलते ही सीओ कादीपुर डीपी शुक्ला, तहसीलदार हरीशचंद्र व एसओ करौंदीकलां अमित कुमार भी मौके पर पहुंच गए। तहसीलदार ने कहा कि पानी में डूबकर मरने वाले बच्चों के परिवारीजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाई जाएगी।

देवदूत बनकर पहुंचे निषादराज
सहाबुद्दीनपुर गांव के किनारे जब नौ बच्चे पानी में डूबे तो निषादराज के नाम से चर्चित बाल मुकुंद निषाद, शिवकुमार निषाद, बबलू निषाद, राजकुमार निषाद, श्रीकांत निषाद और मंतलाल वहां मौजूद थे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर सभी मछुआरे नदी में कूद गए। एक-एक कर पांच बच्चों को मछुआरों ने बचा लिया, लेकिन चार बच्चों को नहीं बचा पाने का मछुआरों को मलाल है। बाल मुकुंद ने कहा कि सभी बच्चों को बचा पाते तो हम लोगों को खुशी होती।

बेटे की मौत का मां को नहीं यकीन

रमसापुर गांव निवासी हरिलाल के परिवार में पत्नी लक्ष्मीना के साथ ही दो बेटे थे। इनमें सबसे बड़ा बेटा सभाजीत (19) व छोटा मनीष (11) के साथ ही बेटी सनी, मनी हैं। मनीष की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। लक्ष्मीना को छोटे बेटे की मौत पर यकीन नहीं हो रहा था।

भाई के शव के पास बैठकर बिलखता रहा बड़ा भाई
रमसापुर निवासी त्रिभुवन पासवान के परिवार में पत्नी प्रियंका के साथ ही दो बेटे थे। बड़ा बेटा सत्यम (11) और छोटा शिवम (8) था। नदी में डूबने से शिवम की मौत हो गई, जबकि मछुआरों ने सत्यम को बचा लिया। छोटे भाई की मौत से आहत सत्यम काफी देर तक अपने भाई के शव के पास ही बैठकर बिलखता रहा।

...और हम दोनों भाइयों को पानी में डूबने से बचा लिया

सूरज ने बताया कि वह जब पानी में डूबने लगा तो अपने छोटे भाई लक्की का हाथ पकड़ा था। दोनों भाई जोर-जोर से भगवान को याद करके चिल्ला रहे थे कि भगवान बचाओ, ऐसे में अंकल आ गए और हम दोनों भाइयों को पानी में डूबने से बचा लिया।

करीम ने बताया कि वह चिल्ला रहा था, तभी चाचा पानी में आ गए और मेरे बाल पकड़कर पानी से बाहर निकाल लिया। यदि चाचा (मछुआरे) नहीं आते तो मैं बच नहीं पाता।

सत्यम ने रोते हुए कहा कि जिस समय मैं और मेरा छोटा भाई शिवम पानी में डूब रहे थे तो मैंने जोर-जोर से आवाज लगाई। ऐसे में मछुआरे पहुंचे और मुझे तो बचा लिया, लेकिन मेरा प्यारा भाई नहीं रहा। मनीष ने बताया कि वह पानी में थोड़ा डूबा था। तभी मछुआरों ने उसे बचा लिया।

हादसे वाली जगह पर नदी 30 फिट गहरी

बच्चों को बचाने वाले निषादराज बाल मुकुंद ने बताया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां 30 फिट गहराई है। अमूमन उस स्थान पर पानी में तैरने वाले लोग भी जाने से बचते हैं। ऐसे में बच्चों को पानी से बचा पाना संभव नहीं था, लेकिन भगवान ने बच्चों को बचाने की हिम्मत दी।

काश भाई को पीटने के बजाय उसे कमरे में बंद कर दिया होता
बौढ़िया बालमऊ गांव की रहने वाली शबनम के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। बार-बार यही बोलती कि जब छोटा भाई मछली पकड़ने के लिए नदी में जाने की जिद कर रहा था तब उसने उसे दो थप्पड़ मारा था। इसके बाद भी हमीद मछली पकड़ने के लिए घर से निकल गया। उसे क्या पता था कि मेरा भाई अब वापस नहीं लौटेगा। शबनम ने कहा कि काश उसने भाई को मारने के बजाय किसी कमरे में बंद कर दिया होता।
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